मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद बहूबाजार के उन परिवारों के चेहरों पर फिर मुस्कान लौटी है, जिन्हें ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के दौरान हुई भू-धंसान के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा था। पहले चरण में दुर्गा पिटुरी लेन के चार नवनिर्मित मकानों में 20 लोग अपने नए घरों में लौट आए हैं। यह बहूबाजार पुनर्वास परियोजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साल 2019 में ईस्ट-वेस्ट मेट्रो की सुरंग निर्माण के दौरान बहूबाजार इलाके में जमीन धंसने से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके बाद 2022 में भी इसी तरह की घटना हुई, जिससे सैकड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। प्रभावित परिवारों को वर्षों तक किराये के फ्लैटों में रहना पड़ा, जबकि उनके पुराने मकानों को सुरक्षा कारणों से तोड़ दिया गया था।
पहले जैसे स्वरूप में बनाए गए नए मकान
कोलकाता मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (KMRC) ने पुनर्निर्माण के दौरान मकानों का मूल स्वरूप बरकरार रखने की कोशिश की है। नए घरों में पहले की तरह आंगन, पूजा कक्ष, रसोई, निजी और साझा शौचालय तथा खुली छत जैसी सुविधाएं दी गई हैं। मकानों का क्षेत्रफल भी पहले जैसा रखा गया है, ताकि निवासियों को अपने पुराने घर जैसा ही एहसास हो।
घर लौटने की खुशी, वर्षों का इंतजार हुआ खत्म
अपने नए घर में प्रवेश करने वाले परिवारों ने इसे भावुक पल बताया। स्थानीय निवासी विकास शॉ ने कहा कि वर्षों बाद अपने घर लौटना किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि नए मकान में पुराने घर की याद और पहचान दोनों को संजोकर रखा गया है।
22 और मकानों का निर्माण जारी
KMRC ने पहले चरण में कुल 26 मकानों के पुनर्निर्माण की योजना बनाई है। इनमें से चार मकान तैयार होकर निवासियों को सौंप दिए गए हैं, जबकि शेष 22 मकानों का निर्माण तेजी से चल रहा है। निर्माण के दौरान उन हिस्सों को खाली रखा गया है, जिनके नीचे मेट्रो की सुरंग गुजरती है, ताकि सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके।
पुनर्वास परियोजना ने पार किया अहम पड़ाव
फरवरी 2024 में इस पुनर्वास परियोजना का भूमि पूजन किया गया था। अब पहले चरण में प्रभावित परिवारों की घर वापसी के साथ बहूबाजार पुनर्वास अभियान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आने वाले महीनों में बाकी प्रभावित परिवारों को भी उनके नए घर सौंपे जाने की उम्मीद है।