पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और जरूरतमंद बच्चों तक किताबों की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लक्ष्मीपत सिंघानिया अकादमी में अप्रैल से अगस्त तक ‘पढ़ो भारत 2026’ पुस्तक संग्रह अभियान चलाया गया। अभियान में मोंटेसरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। अभियान के तहत विद्यार्थियों ने अपनी ऐसी किताबें दान कीं, जिन्हें दूसरे बच्चे पढ़कर ज्ञान और कल्पना की नई दुनिया से जुड़ सकें। संग्रह में विभिन्न आयु वर्ग के अनुरूप शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक किताबें शामिल रहीं। इनमें छोटे बच्चों के लिए कहानी की किताबों से लेकर बड़े विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक पुस्तकें तक शामिल थीं। स्कूल समुदाय की भागीदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से 2,592 किताबें दान कीं। यह पहल केवल किताबें एकत्र करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में साझा करने, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत किया। हजारों पन्नों की यह यात्रा अब नए पाठकों तक पहुंचेगी। अभियान ने यह संदेश दिया कि जब एक किताब दूसरे हाथों में जाती है, तो उसकी कहानी के साथ उसका प्रभाव भी आगे बढ़ता है।