गंगासागर स्थित कपिल मुनी मंदिर की तस्वीर (फाइल फोटो) 
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2.20 करोड़ रुपये में बना गंगासागर का शाल लकड़ी का कॉटेज अब समुद्री कटाव की जद में

दक्षिण 24 परगना: गंगासागर में नदी और समुद्री कटाव लगातार बढ़ने से करीब 2.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया शाल लकड़ी का कॉटेज अब पूरी तरह तबाही के कगार पर पहुंच गया है। जमीन धंसने और समुद्र के लगातार आगे बढ़ने के कारण कॉटेज का बड़ा हिस्सा भी कटाव की चपेट में आ गया है।

राज्य में 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद गंगासागर मेले के आयोजन और प्रशासनिक कामकाज में सुविधा के लिए इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस बंगले का निर्माण किया गया था। करीब 2.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह कॉटेज स्थानीय लोगों के साथ-साथ गंगासागर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

लेकिन लगातार हो रहे समुद्री कटाव ने अब इसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। कॉटेज के आसपास की जमीन तेजी से धंस रही है, जिससे इसके पूरी तरह नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।

करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को इस तरह बर्बाद होते देख स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि गंगासागर के समुद्र तट और यहां की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए तत्काल स्थायी समुद्री बांध का निर्माण किया जाना चाहिए।

मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। स्थानीय भाजपा नेता राजेश जाना ने राज्य की तृणमूल सरकार पर कटाव रोकने के लिए स्थायी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों से कटाव रोकने के नाम पर अस्थायी और दिखावटी काम ही किए गए।

वहीं, सागर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व तृणमूल विधायक बंकिमचंद्र हाजरा ने कटाव की स्थिति को स्वीकार करते हुए इसके पीछे जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते समुद्री कटाव को प्रमुख कारण बताया।

स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मांग है कि जल्द से जल्द स्थायी समुद्री बांध का निर्माण कर गंगासागर के तट और बची हुई ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित किया जाए।

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