गायक मीका सिंह ने गुरुवार को कहा कि कलाकार सम्मान और गरिमा के हकदार हैं। उन्होंने उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से अपने भाई और गायक दलेर मेहंदी से सार्वजनिक रूप से किए गए व्यवहार के लिए माफी मांगने की मांग दोहराई। मीका ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया।
यह घटना रविवार शाम उत्तराखंड के नई टिहरी में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के दौरान हुई थी। दलेर मेहंदी मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे, तभी उनियाल मंच पर पहुंचे और ऊंची आवाज में उनसे पूछा कि क्या उन्होंने शराब पी रखी है। ‘तुनक तुनक तुन’, ‘बोलो ता रा’ और ‘हो जाएगी बल्ले-बल्ले’ जैसे हिट गानों के लिए मशहूर 59 वर्षीय गायक के वीडियो क्लिप वायरल हुए, जिनमें वह ‘सॉरी’ कहते सुनाई दे रहे हैं।
घटना के बाद से ही मीका सिंह अपने भाई के समर्थन में लगातार बयान दे रहे हैं। एक ताजा पोस्ट में उन्होंने कहा कि मंत्री को दलेर मेहंदी का आभारी होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अंतिम समय में प्रस्तुति देने की जिम्मेदारी निभाई।
मीका ने दावा किया कि इस कार्यक्रम के लिए पहले गायिका सुनंदा शर्मा को बुलाया गया था, लेकिन बुखार के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद कार्यक्रम से महज एक दिन पहले दलेर मेहंदी को बुलाया गया। मीका के मुताबिक, खुद की तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद उनके भाई ने कार्यक्रम में प्रस्तुति दी।
मीका ने कहा कि मंच पर प्रस्तुति देते समय दलेर मेहंदी पर शराब पीने का आरोप लगाए जाने से उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री से कोई गलती हुई है, तो उन्हें इसे स्वीकार करते हुए दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए। मीका ने यह भी कहा कि मंत्री के पास जनता की सेवा से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम हैं और उन्हें उन जिम्मेदारियों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाना चाहिए, जितनी गंभीरता से उन्होंने कलाकार से सवाल किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दलेर मेहंदी जैसे वरिष्ठ कलाकार सम्मान के हकदार हैं, अपमान के नहीं।
एक अन्य पोस्ट में मीका ने कहा कि दुनियाभर के कलाकार और प्रशंसक दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आए हैं, जबकि उनियाल के समर्थन में कोई आगे नहीं आया। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि वे उत्तराखंड और वहां के लोगों से प्यार करते हैं, लेकिन कलाकारों को भी गरिमा और सम्मान मिलना चाहिए।