स्कूल में खुशी मैडम का पहला दिन था। कक्षा सात में पहला घण्टा हिंदी का था। उन्होंने सबसे पहले बच्चों को इमला बोला। इमला के माध्यम से वे बच्चों की व्याकरण और लिखावट जाँचना चाहती थीं।
सुदूर गाँव में स्कूल होने के कारण किसी बच्चे के पास पेन नहीं था तो किसी के पास कापी नहीं थी। अधिकांश बच्चों के पास किसी न किसी सामान की कमी थी। बच्चों को पढ़ने-लिखने सामान की कमी न हो इसके लिए उन्होंने एक तरीका निकाल लिया था।
खुशी मैडम के पर्स में कापी, पेंसिल, रबड़, पेन, कटर भरे रहते थे। जिस बच्चे को किसी सामान की जरूरत होती वह उसे मिल जाता। बच्चों को स्कूल अपने घर जैसा लगने लगा। मैडम की क्लास बच्चों को खुशियों से भर देती। स्वभाव ही ऐसा था मैडम का। वे बच्चों की खुशी में अपनी खुशी देखती थीं।
उन्हें जूनियर हाईस्कूल में आए आठ महीने बीत चुके थे। इन आठ महीनों में स्कूल के बच्चे उनसे ऐसे घुलमिल गए थे जैसे वे यहाँ कई सालों से पढ़ा रही हों।
मैडम का बच्चों के साथ इस तरह घुलमिल जाना और शिक्षक-शिक्षिकाओं को अखरने लगा। उन्हें जब भी मौका मिलता खुशी मैडम को कोसने लगते। काजल मैडम ने सुनीता मैडम से कहा "महारानी की अभी नई-नई नौकरी है। कुछ दिनों में बच्चों की खुशी का भूत उतर जाएगा। देखते हैं कब तक पेन, पेंसिल, रबड़.......बाँटेगी।"
"हाँ, सही कह रही हैं मैडम। कुछ दिन बाद सब बंद हो जाएगा। पता नहीं पर्स में क्या-क्या भरी रहती है। बच्चों को पढ़ाती कम है, सामानं ज्यादा बाँटती है। रोज बच्चों को कुछ न कुछ देती रहती है।"
सुबह बच्चे 'वह शक्ति हमें दो ........।' प्रार्थना को टूटी-फूटी भाषा में करके अपने कक्षाओं में जा चुके थे। सातवीं कक्षा का पहला घण्टा था। खुशी मैडम ने ज्योंही कक्षा में प्रवेश किया तो सभी बच्चे खड़े होकर नमस्ते मैडम जी, नमस्ते मैडम जी............ कहने लगे। उन्होंने भी मुस्कुराते हुए सभी बच्चों के नमस्ते का उत्तर दिया। रजिस्टर में बच्चों की उपस्थिति दर्ज कर उन्होंने अपना पर्स खोला।
कुछ बच्चे टॉफियाँ चूसने लगे और बाकी किताबों के पेज पलटने लगे। तोहफे पाकर सभी बच्चों की खुशी देखते बन रही थी। बच्चों के खिलखिलाते चेहरे को देखकर मैडम की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच गई।
मैडम बैग से ढेर सारी टॉफियाँ और पुस्तकें निकालकर मेज पर रख दीं। सभी बच्चों की निगाहें टॉफियों पर टिक गईं। टॉफियों को देखकर उनके मुँह में पानी आ गया। उन्होंने एक-एक कर सभी बच्चों को बुलाया और हर बच्चे को दो-दो टॉफियाँ और एक पुस्तक दीं। कुछ बच्चे टॉफियाँ चूसने लगे और बाकी किताबों के पेज पलटने लगे। तोहफे पाकर सभी बच्चों की खुशी देखते बन रही थी। बच्चों के खिलखिलाते चेहरे को देखकर मैडम की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच गई।
अनुज ने पूछा-"मैडम जी आज आपका बर्थडे है क्या?" मुस्कुराते हुए मैडम ने जवाब दिया- "हाँ, आज मेरा बर्थडे है।" सभी बच्चों ने उत्साह के साथ एक सुर में मैडम को 'हैप्पी बड्डे' बोला। मैडम ने सभी को 'थैंक्यू वेरी मच, थैंक्यू........' कहा।
रेखा भी मैडम से टॉफी और किताब लेकर अपनी सीट पर बैठ गई। रेखा ने मैडम को हैप्पी बर्थडे नहीं बोला। उसने टॉफी भी नहीं खाई। वह अचरज भरी निगाहों से मैडम को एकटक देखे जा रही थी। अचानक मैडम की नजर रेखा पर पड़ी तो उसने नजरें नीचे कर ली। मैडम पढ़ाने में व्यस्त हो गईं। कुछ देर बाद मैडम ने देखा कि रेखा उन्हें फिर निहार रही थी। वे उससे कहने लगीं -"रेखा, तुमने टॉफी नहीं खाई? तुमको टॉफी अच्छी नहीं लगती?"
"जी मैडम, जी मैडम, मुझे टॉफी अच्छी लगती है। बहुत अच्छी लगती है।" बनावटी मुस्कुराहट के साथ उसने उत्तर दिया।
"तो फिर टॉफी क्यों नहीं खा रही हो। तुम्हें टॉफ़ी अच्छी नहीं लगती तो किसी बच्चे को दे दो।"
रेखा को लगा कि मैडम सच में टॉफियाँ किसी और बच्चे को न दे दें इसलिए उसने तुरंत दोनों टॉफियाँ मुँह में डाल ली। उसने अपनी नजरें किताब में गड़ा दी। लेकिन बीच-बीच में वह मैडम को तिरछी नजरों से देख लेती। मैडम समझ गईं कि रेखा के मन में कुछ सवाल हैं। वह कुछ पूछना चाहती है।
उन्होंने रेखा से पूछा -"क्या हुआ? क्या समस्या है?" बोलती क्यों नहीं?" उसने बिना कुछ बोले नहीं में सिर हिला दिया। मैडम बच्चों के व्यवहार से भली-भाँति परिचित थीं। रेखा के चेहरे का भाव बता रहा रहा था कि वह किसी बात को लेकर असमंजस में है। उन्होंने रेखा को अपने पास बुलाया और पूछा-"मुझे पता है तुम कुछ पूछ्ना चाह रही हो। क्या बात है? बताओ तो।"
रेखा ने अपने तरीके से मैडम को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि उसे किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। वह मैडम से कुछ नहीं पूछना चाहती। मैडम भी मान गईं कि हो सकता है उसका अनुमान गलत हो।
रेखा स्कूल से आने के बाद भी मैडम के बर्थडे को लेकर सोचती विचारती रही। उसे अम्मा की बात "लड़कियों का बड्डे नहीं मनाया जाता।" बार-बार उसके कानों में दस्तक देता रहा। वह दुविधा में पड़ गई। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अम्मा की बात माने या मैडम के बर्थडे को।
अगले दिन फिर मैडम का पहला घण्टा। रेखा का निर्लिप्त चेहरा मैडम को सोचने पर मजबूर कर रहा था। मैडम ने रेखा को अपने पास बुलाकर फिर पूछा कि तुम्हें कोई समस्या हो तो खुलकर बताओ, डरो नहीं। इस बार भी उसने कुछ बोले बिना, नहीं में सिर हिला दिया। मैडम के बार-बार कहने पर उसने पूछा-"मैडम जी आपका बर्थडे मनाया जाता है?"
"अरे! तुम तो दो दिन से मेरे बर्थडे के पीछे क्यों पड़ी हो? तुम्हें मेरे बर्थडे से क्या लेना देना है?"
"मैडम जी पहले आप बताइए।"
मैडम ने कहा "हाँ, मेरा बर्थडे मनाया जाता है। हर साल मनाया जाता है। मेरा बर्थडे मेरा पूरा परिवार मनाता है।"
"लेकिन ले......अम्मा तो कहती है कि लड़कियों का बर्थडे नहीं मनाया जाता।"
कभी-कभी अपनों द्वारा दिए गए ताने ग्रंथि बन जाते हैं। सामने परिस्थितियां आने पर वह ग्रंथि उभर आती है। खुशी मैडम के मन में भी एक ग्रंथि बन चुकी थी। वे अपने परिश्रम से उसे भूलने में सफल रही थीं। 'लड़कियों का बर्थडे नहीं मनाया जाता' इस वाक्य ने मैडम की ग्रंथि को फिर से उभार दिया।
कभी-कभी अपनों द्वारा दिए गए ताने ग्रंथि बन जाते हैं। सामने परिस्थितियां आने पर वह ग्रंथि उभर आती है। खुशी मैडम के मन में भी एक ग्रंथि बन चुकी थी। वे अपने परिश्रम से उसे भूलने में सफल रही थीं। 'लड़कियों का बर्थडे नहीं मनाया जाता' इस वाक्य ने मैडम की ग्रंथि को फिर से उभार दिया। मैडम अपने बचपन की उस घटना में डूब गईं, जब बचपन में उनके छोटे भाई का बर्थडे धूमधाम से मनाया जाता था जबकि उनका बर्थडे नहीं मनाया जाता था। बचपन में बर्थडे मनाने के लिए खुशी हर साल माँ से लड़ती झगड़ती तब एक बार माँ ने भी कहा था-"लड़कियों का बर्थडे नहीं मनाया जाता।"
खुशी बार-बार पूछती-"आखिर क्यों? क्यों?...........?" उसकी माँ उसे सच्चाई नहीं बताना चाहती थी। वह कहने का साहस नहीं जुटा पाई कि वह चाहती है कि उसकी बेटी का भी बर्थडे धूमधाम से मनाया जाय पर उसके पिता नहीं चाहते। एक बार गुस्से में आकर उसकी माँ ने कहा था-"जब तुम कमाना तो खुद अपना बर्थडे मनाना।" उसी समय खुशी ने प्रण किया था कि वह अपनी खुशियों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेगी।
रेखा ने मैडम से पूछा-"मैडम जी मैं जाऊँ?"
मैडम को होश आया कि वह कक्षा में है। उन्होंने रेखा से कहा-"हाँ, हाँ लड़कियों का भी बर्थडे मनाया जाता है।"
उन्होंने अपनी डायरी निकाली और उसमें सब बच्चों के बर्थडे लिखने लगीं। मैडम अपने बर्थडे के साथ-साथ स्कूल में सभी बच्चों के बर्थडे मनाने लगीं।