रेड कार्पेट पर अपनी अदाओं का जलवा बिखेरना हो या कैमरे के सामने दमदार अभिनय, पूजा हेगड़े का नाम आज हर जुबां पर है। स्टाइल आइकन होने के साथ-साथ फिटनेस की मिसाल बनीं यह अभिनेत्री इंटरनेट पर अपनी हॉट तस्वीरों से अक्सर तापमान बढ़ा देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुंबई में पली-बढ़ीं और उडुपी (कर्नाटक) की जड़ों से जुड़ीं इस हसीना का सफर कितना दिलचस्प रहा है?
मॉडलिंग से लेकर ब्यूटी पेजेंट तक का संघर्ष
एक वकील पिता और डॉक्टर भाई की बहन, पूजा ने कॉमर्स से ग्रेजुएशन किया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। क्लासिकल डांस और मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखते ही रणबीर कपूर के साथ 'हीरो मैस्ट्रो' के विज्ञापन ने उन्हें रातों-रात ब्रांड्स का चहेता बना दिया। साल 2009 में 'मिस इंडिया' के शुरुआती दौर में बाहर होने के बाद भी पूजा ने हार नहीं मानी। 2010 में उन्होंने वापसी की और 'सेकंड रनर-अप' बनकर अपनी काबिलियत साबित की। फिर क्या था, मिस इंडिया साउथ और मिस यूनिवर्स में उनकी जीत ने फिल्म इंडस्ट्री के दरवाजे खोल दिए।
साउथ में कामयाबी की 'सुपरस्टार'
तमिल फिल्म 'मूगामूडू' (2012) से शुरुआत करने वाली पूजा ने 'ओका लैला कोसम' के जरिए तेलुगु सिनेमा में कदम रखा। फिर तो कामयाबी का सिलसिला ऐसा चला कि 'महर्षि', 'अला वेकुंठपूर्मुलु' और 'बीस्ट' जैसी फिल्मों ने उन्हें साउथ का पावरहाउस बना दिया। उन्होंने वहां एक के बाद एक कई सफल फिल्मों के साथ अपनी जगह पक्की कर ली।
बॉलीवुड का 'स्ट्रगल' और उम्मीदों का टूटा तिलिस्म
पूजा की बॉलीवुड एंट्री भव्य थी-आशुतोष गोवारीकर की 'मोहनजोदाड़ो' में ऋतिक रोशन के साथ। लगा कि एक नया सितारा चमकने आया है, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही सोचा था। 'हाउसफुल 4' जैसी बड़ी फिल्म के बाद उन्होंने सलमान खान के साथ 'किसी का भाई किसी की जान' और रणवीर सिंह के साथ 'सर्कस' में काम किया।
प्रभास के साथ 'राधे श्याम' जैसी पैन-इंडिया फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई। हाल ही में शाहिद कपूर के साथ 'देवा' और वरुण धवन के साथ 'है जवानी तो इश्क होना है' जैसी फिल्मों से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इन फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर जो हाल हुआ, उसने पूजा के बॉलीवुड करियर को एक बड़े झटके की तरह प्रभावित किया।
अभी तो उड़ान बाकी है!
दक्षिण भारत में जहां पूजा हेगड़े के नाम का सिक्का चलता है और उनकी फिल्में 'ब्लॉकबस्टर' का टैग आसानी से हासिल कर लेती हैं, वहीं बॉलीवुड में उनका सफर अब तक संघर्षों से भरा रहा है। बड़े प्रोजेक्ट्स और नामी सितारों के साथ काम करने के बावजूद, वह हिंदी दर्शकों के दिलों में अपनी वह गहरी छाप छोड़ने में नाकाम रही हैं, जिसकी उम्मीद उनके फैंस करते थे। खैर, सिनेमा की दुनिया में किस्मत बदलते देर नहीं लगती।
क्या पूजा अपनी अगली पारी में हिंदी पट्टी के दर्शकों का दिल जीत पाएंगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा! -सुभाष शिरढोनकर (युवराज)