प्रश्न : काफी समय बाद आपसे मुलाकात हो रही है। आपने अपने लंबे करियर में अनगिनत फिल्में बनाई हैं। अपने सफर के बारे में कुछ बताइए।
के.सी. बोकाडिया : मेरा सफर बहुत लंबा और यादगार रहा है । मैंने अपनी पहली फिल्म 1970 में संजीव कुमार, माला सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ बनाई थी । दूसरी फिल्म में फिरोज़ खान, नीतू सिंह और धर्मेंद्र थे। इसके बाद प्यार झुकता नहीं, तेरी मेहरबानियां, नसीब अपना अपना, कुदरत का कानून, कब तक चुप रहूंगी, फूल बने अंगारे और पुलिस और मुजरिम जैसी कई फिल्में बनाईं। खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि भारतीय सिनेमा के लगभग हर बड़े कलाकार के साथ काम करने का अवसर मिला।
प्रश्न: मीडिया के साथ आपका रिश्ता हमेशा बहुत अच्छा रहा है। इसके बारे में क्या कहना चाहेंगे?
के.सी. बोकाडिया : मीडिया ने हमेशा मुझे सम्मान और प्यार दिया है। मेरे काम को सराहा और हर कदम पर मेरा साथ दिया। आज जो पहचान मुझे मिली है, उसमें दर्शकों के साथ-साथ मीडिया का भी बहुत बड़ा योगदान है। मैं सभी का दिल से आभारी हूँ ।
प्रश्न : आपकी नई फिल्म ‘मेरी तीसरी बेगम’ का शीर्षक काफी अलग और दिलचस्प है। इसकी कहानी का विचार आपको कैसे आया?
के.सी. बोकाडिया : इस कहानी की प्रेरणा मुझे एक वास्तविक घटना से मिली। मैं एक ऐसे व्यक्ति से मिला जिसकी तीन पत्नियाँ थीं और वे अलग-अलग समुदायों से थीं। उस घटना ने मेरे मन में एक कहानी का बीज बो दिया। लेकिन यह फिल्म बहुविवाह का समर्थन नहीं करती। यह रिश्तों, भावनाओं और इंसान के फैसलों के परिणामों पर आधारित एक सामाजिक कहानी है। शीर्षक भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन फिल्म का संदेश बेहद सकारात्मक है।
मेरा मानना है कि फिल्म की सफलता उसके कंटेंट से आनी चाहिए, विवादों से नहीं।
प्रश्न : फिल्म के विषय को लेकर विवाद की संभावना थी, लेकिन आपने कभी विवादों का सहारा नहीं लिया। इसकी क्या वजह है?
के.सी. बोकाडिया : विवाद पैदा करना कभी मेरी सोच का हिस्सा नहीं रहा। मैं किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को आहत करके अपनी फिल्म का प्रचार नहीं करना चाहता। मेरा मानना है कि फिल्म की सफलता उसके कंटेंट से आनी चाहिए, विवादों से नहीं।
मैं अपनी कहानियों के जरिए उन्हीं भावनाओं और रिश्तों को ईमानदारी से दर्शाने की कोशिश करता हूँ, ताकि लोग सोचने पर मजबूर हों ।
प्रश्न : आपकी फिल्मों में अक्सर सामाजिक संदेश देखने को मिलता है। क्या यह आपकी सोच का हिस्सा है ?
के.सी. बोकाडिया : बिल्कुल। सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज का आईना भी है। हर परिवार की अपनी परेशानियाँ होती हैं। मैं अपनी कहानियों के जरिए उन्हीं भावनाओं और रिश्तों को ईमानदारी से दर्शाने की कोशिश करता हूँ, ताकि लोग सोचने पर मजबूर हों ।
मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूँ कि मुझे इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला
प्रश्न : आपने अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, सलमान खान, शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय सहित कई बड़े सितारों के साथ काम किया है। उनका अनुभव कैसा रहा?
के.सी. बोकाडिया : मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूँ कि मुझे इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला । सभी ने हमेशा मुझे सम्मान दिया। हर कलाकार की अपनी अलग खूबी होती है और मैंने हर किसी से कुछ न कुछ सीखा है।
प्रश्न : सलमान खान के साथ काम करने का कोई दिलचस्प किस्सा बताइए।
के.सी. बोकाडिया : एक बार सेट पर सलमान खान एक महत्वपूर्ण दृश्य की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने निर्देशक से कहा कि मुझे कुछ देर के लिए बाहर भेज दें क्योंकि मेरी मौजूदगी में वे थोड़ा संकोच महसूस कर रहे थे। मैंने इसे कभी बुरा नहीं माना। बाद में हम सबने इस बात पर खूब हँसी-मज़ाक किया। आज वह एक प्यारी याद बन चुकी है।
प्रश्न : क्या आप भविष्य में अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान जैसे सितारों के साथ फिर काम करना चाहेंगे?
के.सी. बोकाडिया : बिल्कुल । अगर मुझे सही कहानी मिले तो मैं आज भी उनके साथ काम करना चाहूँगा। अच्छे रिश्ते और आपसी सम्मान सबसे बड़ी पूंजी होते हैं ।
प्रश्न : आज के दौर में फिल्में बनाना काफी महंगा हो गया है। आप फिल्म निर्माण के आर्थिक पक्ष को कैसे देखते हैं?
के.सी. बोकाडिया : फिल्म निर्माण एक व्यवसाय है, इसलिए पैसा ज़रूरी है। लेकिन मैंने कभी सिर्फ पैसों को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया । मेरा विश्वास है कि अगर आपकी नीयत साफ है और आपका काम ईमानदार है, तो आर्थिक सहयोग अपने आप मिल जाता है।
मैं हर दिन भगवान का आभार व्यक्त करता हूँ
प्रश्न : इतने लंबे करियर के बाद भी आपको लगातार काम करने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?
के.सी. बोकाडिया : मैं हर दिन भगवान का आभार व्यक्त करता हूँ। सुबह उठकर लिखता हूँ। जब कोई अच्छा विचार आता है, तो मुझे लगता है कि यह ईश्वर की कृपा है। यही विश्वास मुझे लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
मैं एक पारिवारिक और सामाजिक संदेश देने वाली सीरीज़ का निर्देशन कर रहा हूँ। इसकी कहानी हर परिवार से जुड़ी हुई है और इसमें रिश्तों की जटिलताओं को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
प्रश्न : अब आप टेलीविजन के लिए भी काम कर रहे हैं। अपने नए प्रोजेक्ट के बारे में बताइए ।
के.सी. बोकाडिया : हाँ, मैं एक पारिवारिक और सामाजिक संदेश देने वाली सीरीज़ का निर्देशन कर रहा हूँ। इसकी कहानी हर परिवार से जुड़ी हुई है और इसमें रिश्तों की जटिलताओं को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। इसमें दर्शन जरीवाला, सुप्रिया कर्णिक, मुक्ता गोडसे, राकेश बेदी, अमन वर्मा, महेश ठाकुर सहित कई बेहतरीन कलाकार हैं।
प्रश्न : राकेश बेदी की सफलता के बाद क्या उनमें कोई बदलाव आया है?
के.सी. बोकाडिया : बिल्कुल नहीं । राकेश आज भी पहले की तरह बेहद सरल और ज़मीन से जुड़े हुए इंसान हैं। सफलता ने उन्हें बिल्कुल नहीं बदला ।
अगर विषय दमदार हो और फिल्म ईमानदारी से बनाई जाए, तो दर्शक उसे जरूर अपनाते हैं
प्रश्न : आज के समय में क्या बड़ी स्टार कास्ट ज़्यादा ज़रूरी है या अच्छी कहानी ?
के.सी. बोकाडिया : स्टार अपनी जगह महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे एक ब्रांड होते हैं। लेकिन आखिरकार जीत हमेशा अच्छी कहानी की ही होती है। अगर विषय दमदार हो और फिल्म ईमानदारी से बनाई जाए, तो दर्शक उसे जरूर अपनाते हैं।
प्रश्न : अंत में, नए फिल्मकारों के लिए आपका क्या संदेश होगा ?
के.सी. बोकाडिया : अपनी कहानी पर भरोसा रखिए। ईमानदारी से काम कीजिए, सभी का सम्मान कीजिए और सिर्फ सुर्खियाँ बटोरने के लिए विवादों का सहारा मत लीजिए। मेहनत, धैर्य और सच्ची नीयत के साथ किया गया काम हमेशा लोगों के दिल तक पहुँचता है।
-लिपिका वर्मा