बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता सुनील शेट्टी अपनी दमदार अभिनय शैली और सादगी के लिए जाने जाते हैं। लेटेस्ट फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' में एक बार फिर वह मल्टीस्टारर कास्ट के साथ दर्शकों का मनोरंजन कर रही है। इस विशेष बातचीत में सुनील शेट्टी ने मल्टीस्टारर फिल्मों की अहमियत, अक्षय कुमार के साथ अपनी दोस्ती, फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा चुनौतियों और बदलते दौर में स्टारडम को बनाए रखने जैसे कई दिलचस्प विषयों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
मेरा मानना है कि आज के दौर में मल्टीस्टारर फिल्में ही हमारी फिल्म इंडस्ट्री को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत फॉर्मूला हैं।
प्रश्न : मल्टीस्टारर फिल्मों में काम करने से क्या कभी असुरक्षा की भावना आती है?
सुनील शेट्टी : दूसरे कलाकारों के साथ काम करने का अपना अलग ही आनंद और ऊर्जा होती है। कई बार वही ऊर्जा आपको प्रेरित करती है और आपके प्रदर्शन को बेहतर बनाती है। मल्टीस्टारर फिल्मों में काम करने के लिए आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है क्योंकि आप कई कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा कर रहे होते हैं। जैसे-जैसे कलाकार खुद पर भरोसा करने लगते हैं, वे ऐसी फिल्मों में अधिक सहज महसूस करते हैं। मेरा मानना है कि आज के दौर में मल्टीस्टारर फिल्में ही हमारी फिल्म इंडस्ट्री को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत फॉर्मूला हैं।
प्रश्न : अक्षय कुमार की कोई शरारत जो आज भी याद हो?
सुनील शेट्टी : एक बार प्रियदर्शन और मैं साथ बैठे थे। तभी अक्षय ने मेरा फोन उठा लिया और किसी से बात करने लगे। मुझे नहीं पता कि किसका फोन था, लेकिन मैं उन्हें कहते हुए सुन रहा था, "वो (सुनील) यहाँ नहीं है," और उन्होंने फोन रख दिया। जब मैंने उनसे पूछा कि फोन किसका था, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, "तेरा फोन है, तुझे मालूम होना चाहिए।"
प्रश्न : अक्षय कुमार के साथ आपकी जोड़ी हमेशा से दर्शकों की पसंदीदा रही है। एक बार फिर उनके साथ काम करना कैसा रहा ?
सुनील शेट्टी : इस फिल्म में हमारे किरदारों के बीच प्यार और तकरार का खूबसूरत रिश्ता देखने को मिलेगा। पूरी फिल्म में हम एक-दूसरे के खिलाफ नजर आते हैं, लेकिन अंत में साथ खड़े होते हैं। यही क्लासिक सिनेमा की खूबसूरती है। आखिरकार सब कुछ कहानी पर निर्भर करता है। मेरा मानना है कि ईमानदारी से किया गया अभिनय हमेशा असर छोड़ता है।
हर शुक्रवार फिल्मों में करोड़ों रुपये का निवेश होता है। ऐसे में इंडस्ट्री के लिए टिकाऊ व्यवस्था बेहद जरूरी है। निर्माता अपनी लागत निकाल सकें, यह सबसे महत्वपूर्ण है। हमें फिल्म व्यवसाय को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के बारे में सोचना होगा।
प्रश्न : बढ़ते बजट और बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही फिल्मों के बीच आप फिल्म इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति को कैसे देखते हैं?
सुनील शेट्टी : हर शुक्रवार फिल्मों में करोड़ों रुपये का निवेश होता है। ऐसे में इंडस्ट्री के लिए टिकाऊ व्यवस्था बेहद जरूरी है। निर्माता अपनी लागत निकाल सकें, यह सबसे महत्वपूर्ण है। हमें फिल्म व्यवसाय को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के बारे में सोचना होगा। नए कलाकारों को भी समझना होगा कि किसी फिल्म की सफलता सही साझेदारी और टीमवर्क पर निर्भर करती है। निर्माता भारी-भरकम बजट लगाते हैं और मौजूदा समय मनोरंजन उद्योग के लिए अच्छा दौर नहीं कहा जा सकता।
अगर मैं यह फिल्म अकेले हीरो के तौर पर कर रहा होता, तो शायद इसका नाम सिर्फ 'वेलकम' होता
प्रश्न : फिल्म के शीर्षक 'वेलकम टू द जंगल' पर आपका क्या कहना है?
सुनील शेट्टी : अक्षय कुमार का नाम अपने आप में एक बड़ी पहचान है। इतने बड़े कलाकारों के साथ बनी इस film के लिए 'वेलकम टू द जंगल' बिल्कुल उपयुक्त शीर्षक है। अगर मैं यह फिल्म अकेले हीरो के तौर पर कर रहा होता, तो शायद इसका नाम सिर्फ 'वेलकम' होता।
कलाकारों को हमेशा इस बात का संतुलन बनाए रखना पड़ता है कि वे दर्शकों के बीच प्रासंगिक भी बने रहें और जरूरत से ज्यादा एक्सपोज भी न हों।
प्रश्न : क्या आज के डिजिटल दौर में स्टारडम को बनाए रखना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है?
सुनील शेट्टी : बिल्कुल। पहले मीडिया के कुछ ही माध्यम हुआ करते थे, लेकिन आज अनगिनत प्लेटफॉर्म हैं और हर समय लोगों की नजर आप पर रहती है। कलाकारों को हमेशा इस बात का संतुलन बनाए रखना पड़ता है कि वे दर्शकों के बीच प्रासंगिक भी बने रहें और जरूरत से ज्यादा एक्सपोज भी न हों। आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है। राजेश खन्ना जैसे स्टारडम को आज के समय में संभालना कहीं ज्यादा कठिन है।
प्रश्न : लगभग 30 कलाकारों वाली इतनी बड़ी स्टारकास्ट को निर्देशक अहमद खान ने कैसे संभाला ?
सुनील शेट्टी : मैंने पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान अहमद को एक बार भी गुस्सा होते नहीं देखा। इतनी बड़ी फिल्म का निर्देशन करना बेहद चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण हो सकता है, लेकिन उन्होंने अपने शांत स्वभाव और धैर्य से हर चीज़ को बहुत खूबसूरती से संभाला। उन्होंने शानदार काम किया। -लिपिका वर्मा