इंडियन आइडल के प्रतिभाशाली प्रतियोगी तनिष्क शुक्ला अपनी मधुर आवाज़, क्लासिकल गायकी और विनम्र व्यक्तित्व से देशभर के दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। ग्वालियर से शुरू हुआ उनका संगीत का सफर अब इंडियन आइडल के मंच तक पहुँच चुका है। इस विशेष बातचीत में तनिष्क ने अपने परिवार, संगीत की शुरुआत, इंडियन आइडल की यात्रा और अपने भविष्य के सपनों के बारे में खुलकर बात की।
मेरे पिता बहुत अच्छे गायक हैं और आज भी बेहद खूबसूरती से गाते हैं। मेरी माँ भी अपने कॉलेज के दिनों में गाया करती थीं
प्रश्न : अपने पारिवारिक परिवेश के बारे में थोड़ा बताइए। क्या घर में संगीत का माहौल था ?
तनिष्क शुक्ला : मैं यह नहीं कहूँगा कि मेरे परिवार में कोई पेशेवर गायक था, लेकिन संगीत हमेशा हमारे आसपास रहा है। मेरे पिता बहुत अच्छे गायक हैं और आज भी बेहद खूबसूरती से गाते हैं। मेरी माँ भी अपने कॉलेज के दिनों में गाया करती थीं, लेकिन बाद में करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गईं। उनकी अपनी यात्रा भी बहुत प्रेरणादायक रही है-उन्होंने हिंदी और संस्कृत की शिक्षिका के रूप में काम किया और बाद में अपना ब्यूटी पार्लर भी शुरू किया। इसलिए भले ही संगीत को पेशे के रूप में नहीं अपनाया गया, लेकिन घर में संगीत के प्रति गहरा सम्मान और लगाव हमेशा रहा।
प्रश्न : गायन की ओर आपका सफर कैसे शुरू हुआ?
तनिष्क शुक्ला : मेरी यात्रा ग्वालियर से शुरू हुई, जहाँ मैंने अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि मेरी बहन ने संगीत सीखना शुरू किया था और उसी के माध्यम से मुझे भी औपचारिक संगीत शिक्षा से परिचय मिला। हालांकि उस समय मेरा मुख्य जुनून शतरंज था। मैं एक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त शतरंज खिलाड़ी था और ग्रैंडमास्टर बनने का सपना देखता था। लेकिन जिंदगी ने मेरे लिए कुछ और ही तय कर रखा था। धीरे-धीरे संगीत मेरी जिंदगी में आया और वही मेरी पहचान बन गया।
आज मेरे गुरु श्री प्रकाश वरुण जी हैं, जिनके मार्गदर्शन में मैंने संगीत की उन्नत शिक्षा प्राप्त की है। आज जो कुछ भी मैं हासिल कर पा रहा हूँ, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।
प्रश्न : आपके संगीत गुरु और मार्गदर्शक कौन रहे हैं?
तनिष्क शुक्ला : मेरी शुरुआती शिक्षा ग्वालियर में श्री रवि शंकर शर्मा जी से हुई, जिन्होंने मुझे संगीत की बुनियादी बातें सिखाईं। बाद में मैंने डॉ. संजय सिंह से भी प्रशिक्षण लिया। इसके बाद मेरे संगीत सफर में एक लंबा अंतराल आया, लेकिन फिर मैंने जबलपुर में दोबारा संगीत सीखना शुरू किया। आज मेरे गुरु श्री प्रकाश वरुण जी हैं, जिनके मार्गदर्शन में मैंने संगीत की उन्नत शिक्षा प्राप्त की है। आज जो कुछ भी मैं हासिल कर पा रहा हूँ, उसमें उनका बहुत बड़ा योगदान है।
शतरंज मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा था। इसके अलावा मुझे डांस करना और संगीत सुनना बहुत पसंद था।
प्रश्न: संगीत के अलावा बचपन में आपकी और क्या रुचियाँ थीं?
तनिष्क शुक्ला : जैसा कि मैंने बताया, शतरंज मेरी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा था। इसके अलावा मुझे डांस करना और संगीत सुनना बहुत पसंद था। मैं हमेशा से माइकल जैक्सन का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूँ। उनके गाने, उनकी परफॉर्मेंस और स्टेज प्रेजेंस मुझे बेहद आकर्षित करते थे। आज भी मैं उन्हें बहुत पसंद करता हूँ।
मैंने इससे पहले भी इंडियन आइडल के लिए ऑडिशन दिया था, शायद 2018 या 2019 के आसपास। मैंने कुछ चरण पार भी कर लिए थे और मुझे वीडियो भेजने के लिए कहा गया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, कुछ संचार संबंधी समस्याओं और परिस्थितियों के कारण मैं ग्राउंड ऑडिशन में शामिल नहीं हो पाया।
प्रश्न : क्या यह आपका पहला रियलिटी शो ऑडिशन था?
तनिष्क शुक्ला : नहीं। मैंने इससे पहले भी इंडियन आइडल के लिए ऑडिशन दिया था, शायद 2018 या 2019 के आसपास। मैंने कुछ चरण पार भी कर लिए थे और मुझे वीडियो भेजने के लिए कहा गया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, कुछ संचार संबंधी समस्याओं और परिस्थितियों के कारण मैं ग्राउंड ऑडिशन में शामिल नहीं हो पाया। उसके बाद मैंने कुछ समय तक रियलिटी शो ऑडिशन से दूरी बना ली। यह सीजन मेरे लिए एक नई शुरुआत है।
प्रश्न: आप क्लासिक गानों के लिए जाने जाते हैं। क्या पुराने गाने आपके पसंदीदा हैं?
तनिष्क शुक्ला : मुझे पुराने गाने बहुत पसंद हैं, लेकिन मैं हर दौर का संगीत सुनना पसंद करता हूँ। मेरा मानना है कि हर पीढ़ी ने बेहतरीन संगीत दिया है। स्वर्णिम दौर ने हमें मोहम्मद रफ़ी साहब, किशोर कुमार जी, लता मंगेशकर जी, आशा भोसले जी, हेमंत कुमार जी, मन्ना डे जी जैसे महान कलाकार दिए। उस दौर के संगीतकारों ने ऐसा कालजयी संगीत रचा, जिसने हिंदी फिल्म संगीत की मजबूत नींव रखी। यही कारण है कि वे गीत आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं। हालांकि, मैं समकालीन संगीत भी सुनता हूँ और नए दौर के गीत भी नियमित रूप से गाता हूँ।
प्रश्न : समकालीन गायकों में आपको सबसे अधिक कौन प्रेरित करता है?
तनिष्क शुक्ला : मैं सोनू निगम जी से बहुत प्रेरित हूँ। मुझे यह बात बेहद पसंद है कि उन्होंने समय के साथ खुद को लगातार विकसित किया है, लेकिन अपनी पहचान भी बनाए रखी है। मुझे अरिजीत सिंह को सुनना भी बहुत पसंद है। दोनों ने मुझे अलग-अलग तरीकों से प्रभावित किया है।
प्रश्न : और दिग्गज गायकों में आपके पसंदीदा कौन हैं ?
तनिष्क शुक्ला : यह हमेशा एक कठिन सवाल होता है क्योंकि मैं कई महान कलाकारों का प्रशंसक हूँ, लेकिन अगर मुझे दो नाम लेने हों, तो मोहम्मद रफ़ी साहब और किशोर कुमार जी मेरे लिए बेहद खास हैं। उनकी कला की तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
जीत के बारे में सोचने के बजाय मैं अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहता हूँ।
प्रश्न: जैसे-जैसे प्रतियोगिता अपने अंतिम चरण में पहुँच रही है, क्या आप खुद को विजेता के रूप में देखते हैं?
तनिष्क शुक्ला : फिलहाल मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अच्छा गाने पर है। हम टॉप 8 में पहुँच चुके हैं और हर प्रतियोगी बेहद प्रतिभाशाली है। जीत के बारे में सोचने के बजाय मैं अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहता हूँ। अगर मैं अच्छा गाता रहूँ और अपने संगीत के प्रति ईमानदार रहूँ, तो शायद परिणाम अपने आप अच्छे होंगे।
मेरा मानना है कि जिस दिन जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा और जिस पर भगवान की कृपा होगी, वही आगे बढ़ेगा।
प्रश्न : प्रतियोगिता में आप अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी किसे मानते हैं?
तनिष्क शुक्ला : सच कहूँ तो मैं किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं ले सकता। हर प्रतियोगी ने शानदार प्रदर्शन किया है और कठिन चुनौतियों का सामना किया है। यह सीजन बेहद प्रतिस्पर्धी है और हममें से कोई भी शीर्ष तक पहुँच सकता है। मेरा मानना है कि जिस दिन जो सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा और जिस पर भगवान की कृपा होगी, वही आगे बढ़ेगा।
मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे अपने शहर से इतना प्रोत्साहन मिला।
प्रश्न: आपकी यात्रा में जनता के समर्थन की कितनी अहम भूमिका रही है?
तनिष्क शुक्ला : यह समर्थन मेरे लिए अभिभूत कर देने वाला रहा है। मेरे शहर जबलपुर के लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया है। मेरे परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों ने सोशल मीडिया और विभिन्न समूहों के माध्यम से मेरा लगातार समर्थन किया है। जबलपुर हमेशा अपने प्रतिभाशाली लोगों का सम्मान करता है, चाहे वह खेल हो, कला हो या कोई और क्षेत्र। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे अपने शहर से इतना प्रोत्साहन मिला।
मुझे जो प्यार और समर्थन मिला है, उसके लिए मैं दिल से आभारी हूँ। सच कहूँ तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने लोग मेरी गायकी से जुड़ाव महसूस करेंगे।
प्रश्न : अपने प्रशंसकों और समर्थकों से आप क्या कहना चाहेंगे?
तनिष्क शुक्ला : मुझे जो प्यार और समर्थन मिला है, उसके लिए मैं दिल से आभारी हूँ। सच कहूँ तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने लोग मेरी गायकी से जुड़ाव महसूस करेंगे। जो कुछ भी हो रहा है, वह मुझे ईश्वर की कृपा लगता है। मैं आगे भी मेहनत करता रहूँगा, सीखता रहूँगा और हर प्रस्तुति में अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश करूँगा। इस सफर में मेरा साथ देने वाले सभी लोगों का दिल से धन्यवाद।
प्रश्न : फिनाले से पहले कोई संदेश?
तनिष्क शुक्ला : मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देता रहूँगा और अपने संगीत के प्रति समर्पित रहूँगा। मैं बस इतना ही वादा कर सकता हूँ। बाकी सब भगवान के हाथ में है। - लिपिका वर्मा