विघ्नहर्ता गणपति, मंगलमूर्ति TOI
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गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? जानिए बप्पा से जुड़े इस पर्व की कहानी

14 सितंबर को मनेगी गणेश चतुर्थी

Tanisha Hirawat

तनीशा हीरावत , सन्मार्ग संवाददाता

सितंबर आते ही बाजारों में गणपति की मूर्तियां, मोदक और सजावट का सामान नजर आने लगता है। घरों से लेकर पंडालों तक बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है।

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

हिंदू परंपरा में गणेश चतुर्थी को भगवान गणपति के जन्मोत्सव के रूप में उल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्हें बुद्धि, समृद्धि और सभी शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि जीवन में किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता का स्मरण करने की परंपरा आज भी अत्यंत गहरी है।

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क्या है बप्पा के जन्म की कहानी?

भगवान गणपति के जन्म की सबसे प्रसिद्ध कथा माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपने द्वार का पहरी नियुक्त कर दिया। जब भगवान शिव वहाँ पहुँचे, तो अज्ञानतावश गणपति ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस बात पर दोनों में विवाद बढ़ा और क्रोधित शिव ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया।

इस घटना से विचलित माता पार्वती के आग्रह पर, शिवजी ने एक हाथी का मस्तक जोड़कर उन्हें पुनर्जीवन दिया। तभी से उनका गजानन और गणपति स्वरूप प्रसिद्ध हुआ।

घर की पूजा से सार्वजनिक उत्सव तक

गणेश चतुर्थी का पर्व अब केवल घरों तक सीमित न रहकर एक विशाल और उल्लासपूर्ण सार्वजनिक उत्सव का रूप ले चुका है। खासकर महाराष्ट्र में, 19वीं सदी के अंत (1893) में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इस पर्व को सामुदायिक एकता का माध्यम बनाते हुए इसे सार्वजनिक रूप दिया था।

समय के साथ यह उत्सव संपूर्ण देश में अत्यंत लोकप्रिय हो गया। आज जहाँ एक ओर घरों में बप्पा का पारंपरिक स्वागत होता है, वहीं दूसरी ओर भव्य पंडाल सजते हैं, जहाँ गूँजती आरती और प्रसाद की मिठास हर मन को आनंद से भर देती है। बप्पा का यह उत्सव हर साल नए उत्साह और उमंग के साथ सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है।

गणपति बप्पा मोरया!

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