भारत में कहावत है कि दो कोस में बदले पानी, चार कोस में बानी (भाषा)। जिस देश में इतनी विविधता हो, वहां के लोगों का खान-पान भी अलग-अलग हो, तो इसमें आश्चर्य कैसा ? भारत के कई राज्य समुद्र से सटे हुए हैं। साथ ही कई राज्य ऐसे भी हैं, जो पहाड़ पर हैं। मुगलों, अंग्रेजों, पुर्तगाली और फ्रांसीसी लोगों ने भी भारत के कई हिस्सों पर शासन किया। वे अपने साथ अपने यहां का भोजन लाए जो समय के साथ भारत के जन-जीवन में रच-बस गए।
उत्तर भारत का अधिकांश क्षेत्र मैदानी है। यहां खूब अन्न होता है, पशु पाले जाते हैं। शायद इसीलिए इस इलाके के भोजन में रोटी-चावल, दाल, सब्जियों के साथ दूध, पनीर और दही का भी भरपूर उपयोग होता है। भारतीय फास्ट फूड समोसा जो अब पूरी दुनिया में मशहूर है, इसी क्षेत्र की देन है। तरह-तरह की चाट, दाल कचौड़ी, जलेबी, इमरती, मुरब्बा, आम पापड़ आदि लोगों के खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं। उत्तर भारत की मिठाइयां भी बहुत मशहूर हैं। मथुरा में बनी मलाई की गिलौरी, खुरचन, पेड़े, आगरा का पेठा, मेरठ की गजक, लखनऊ की रेवड़ी, अलीगढ़ का खाजा और फलूदा आदि खूब पसंद किए जाते हैं।
यदि कम मसालों से बने पौष्टिक खाने की बात की जाए तो दक्षिण भारतीय व्यंजनों का जवाब नहीं। तटीय क्षेत्र में बसे होने के कारण सी-फूड भी आम है। इस इलाके में सबसे ज्यादा उत्पादन चावल का होता है। अतः यहां के परंपरागत दक्षिण भारतीय भोजन में चावल से बने डोसा, इडली, उत्तपम के अलावा वड़ा, रसम, उपमा, सांभर, नारियल चटनी आदि शामिल हैं। इनमें से अधिकांश में चावल और दाल का प्रयोग होता है।
दक्षिण भारतीय भोजन में मसालों का प्रयोग कम मात्रा में होता है। तटीय क्षेत्र होने के कारण नारियल की यहां कमी नहीं है। अतः सुविधानुसार यहां खाने में सरसों से ज्यादा नारियल तेल प्रयोग किया जाता है।
भारत के उत्तरी क्षेत्र में पहाड़ों पर बसे कश्मीर के भोजन का एक अलग आनंद है। यहां के खाने में केसर और कश्मीरी मिर्च का प्रयोग अलग स्वाद देता है। सूखे मेवे और फल भी यहां खूब खाए जाते हैं। खाने के बाद पेश किए गए सेब, स्ट्राबेरी, चेरी आदि भोजन के आनंद को बढ़ा देते हैं।
पंजाबी खाने के शौकीन आज देश-विदेश में मिल जाएंगे। पंजाब की सबसे बड़ी देन है तंदूर। यहां के लोग चावल कम और गेहूं का ज्यादा प्रयोग करते हैं। तंदूर में पकी रोटियों के साथ रूमाली रोटियां, लच्छा पराठे आदि लोग बड़े चाव से खाते हैं। खाने में मसालों का खूब प्रयोग होता है। चना-मसाला, राजमा, दाल मक्खनी आदि तो पूरे भारत के लोग शौक से खाने लगे हैं पर यहां का सबसे प्रसिद्ध खाना है मक्के की रोटी और सरसों का साग। ठंड आते ही पूरे पंजाब में जैसे यह रोज का भोजन बन जाता है।
भारत के पश्चिमी क्षेत्र में महाराष्ट्रियन भोजन अत्यधिक प्रसिद्ध है। समुद्र के किनारे होने के कारण सी-फूड की यहां अधिकता है पर साथ ही सब्जियां भी खूब पसंद की जाती हैं। चावल भोजन का मुख्य आधार है। चावल की रोटियां (भाखरी) भी खाई जाती हैं। यहां सरसों के बदले नारियल तथा मूंगफली का तेल ज्यादा प्रयोग होता है। यहां की प्रसिद्ध मिठाइयां हैं कोंकणी और मालवाणी। साथ ही नव वर्ष पर पूरन पोली खाने का रिवाज है।
बंगाल के खाने में मछलियां छाई हुई हैं। यहां तक कि वहां बनने वाली अधिकांश सब्जियों के साथ भी लोग मछली का प्रयोग कर लेते हैं। यहां की सब्जियों में दम आलू और बैंगन भाजा बहुत प्रसिद्ध हैं। खाने में चावल का प्रयोग ही सबसे ज्यादा होता है। बंगाल अपने परंपरागत खाने के बजाए मिठाइयों के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। चाहे बंगाली रसगुल्ला हो या मिष्टी दोई(मीठा दही), चाहे राजभोग हो या संदेश, लोग इनके दीवाने हैं। बंगाली मिठाइयों को आप ज्यादा समय तक नहीं रख सकते। इन्हें जितनी जल्दी खा लें, अच्छा रहता है।
शाकाहार पसंद लोगों में गुजराती भोजन बहुत प्रसिद्ध है। यहां की सादी कढ़ी का भी जवाब नहीं। यहां बना ढोकला, मिठाइयों में ढोडा और श्रीखंड खूब खाए जाते हैं। मुगलई अंदाज के भोजन के लिए हैदराबाद बहुत प्रसिद्ध है। हैदराबादी बिरयानी के दीवाने आपको हर जगह मिल जाएंगे।
खाने की बात हो और उसमें राजस्थान का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। राजा- महाराजाओं का प्रदेश रहा राजस्थान खान-पान की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। राजस्थानी नमकीन के शौकीन पूरे विश्व में हैं। इसके अलावा मक्का और बाजरे की रोटियां यहां ज्यादा खाई जाती हैं। इनके साथ होती है लहसुन की चटनी और प्याज। दाल-बाटी चूरमा को खाने का अलग ही आनंद है। अब तो यह भोजन राजस्थान की पहचान बन चुका है। (उर्वशी)