परितोष त्रिपाठी 
मनोरंजन

पहली बार मैं कोई किरदार नहीं, खुद को निभा रहा हूं : परितोष त्रिपाठी

परितोष त्रिपाठी आज कविता, हास्य और बेबाक बातचीत के अपने अनोखे अंदाज से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं। छोटी-छोटी महफिलों और निजी मुलाकातों से निकलकर उन्होंने कविता और शायरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पीढ़ी तक पहुंचाया है। एक खास बातचीत में परितोष ने अपने शो, Gen Z, प्यार, शादी, करियर और जिंदगी के उस दौर के बारे में बात की, जहां पहली बार वह किसी किरदार के पीछे नहीं, बल्कि खुद परितोष बनकर सामने आ रहे हैं। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

आज वही काम कैमरे के सामने हो रहा है। बस तरीका बदल गया है, भावनाएं वही हैं। शो को बहुत प्यार मिल रहा है।

आपके शो में कविता, बातचीत, हास्य और मनोरंजन का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। दर्शकों की प्रतिक्रिया को आप किस तरह देखते हैं ?

बहुत अच्छा लग रहा है। पहले हम घर पर बैठते थे या किसी महफिल में मिलते थे, बातें करते थे, गपशप करते थे, कविता सुनाते थे और किस्से साझा करते थे। आज वही काम कैमरे के सामने हो रहा है। बस तरीका बदल गया है, भावनाएं वही हैं। शो को बहुत प्यार मिल रहा है। कुछ रील्स पर 100-200 मिलियन तक व्यूज आए हैं और YouTube पर भी शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह हर शुक्रवार शाम 6 बजे आता है और कुछ लोग तो बाकायदा 6 बजे इसका इंतजार करते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे दर्शकों में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है।

कई बार सोचता हूं कि “हम अपनी उम्र में ऐसे क्यों नहीं थे?” हमारी पीढ़ी कई पारंपरिक सोच में उलझी रही, खासकर सरकारी नौकरी और सुरक्षित करियर की सोच में। हमसे पहले वाली पीढ़ी कई मायनों में काफी प्रोग्रेसिव थी। उसके बाद दो पीढ़ियां कहीं न कहीं थोड़ी कन्फ्यूज हो गईं।

आपके शो से बड़ी संख्या में युवा जुड़े हैं। आज की Gen Z को आप किस नजर से देखते हैं ?

मुझे लगता है कि Gen Z बहुत समझदार और बुद्धिमान है। लोग उनके बारे में बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन जब मैं उन्हें देखता हूं तो कई बार सोचता हूं कि “हम अपनी उम्र में ऐसे क्यों नहीं थे?” हमारी पीढ़ी कई पारंपरिक सोच में उलझी रही, खासकर सरकारी नौकरी और सुरक्षित करियर की सोच में। हमसे पहले वाली पीढ़ी कई मायनों में काफी प्रोग्रेसिव थी। उसके बाद दो पीढ़ियां कहीं न कहीं थोड़ी कन्फ्यूज हो गईं लेकिन हमारे बाद की पीढ़ी अपने फैसलों और सोच को लेकर काफी स्पष्ट है।

आखिर कुछ लड़कियों को बैड बॉय क्यों पसंद आते हैं? क्योंकि बैड बॉय को पता होता है कि उसे क्या चाहिए। वहीं हीरो अक्सर कन्फ्यूज रहता है-“बोलूं या नहीं बोलूं ? समाज क्या कहेगा ?”

क्या यही स्पष्टता उनके रिश्तों और प्यार को लेकर नजरिए में भी दिखाई देती है ?

बिल्कुल। आज “बैड बॉय सिंड्रोम” की काफी चर्चा होती है। आखिर कुछ लड़कियों को बैड बॉय क्यों पसंद आते हैं? क्योंकि बैड बॉय को पता होता है कि उसे क्या चाहिए। वहीं हीरो अक्सर कन्फ्यूज रहता है-“बोलूं या नहीं बोलूं ? समाज क्या कहेगा ?” विलेन सीधे कह देता है, “मुझे तुम चाहिए।” उसमें एक तरह की स्पष्टता होती है। हमारी पुरानी फिल्मों ने भी इस चीज को काफी अच्छी तरह समझा था।

हमारी शादी को 16 साल हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पता है कि मैं क्या और कहां से लिखता हूं। कभी-कभी वह पूछती हैं, “तुमने प्यार के बारे में इतना सब कब लिखा?” मैं कहता हूं, “बहुत पहले।”

आपने अपने शो में प्यार और रिश्तों को लेकर काफी बातें की हैं। क्या इसमें आपके निजी अनुभवों की भी झलक है ?

(हंसते हुए) मैं शादीशुदा हूं, इसलिए अब कम से कम प्यार के बारे में बात तो कर सकता हूं! मैं दोस्तों के साथ इन चीजों पर मजाक करता हूं, लेकिन मेरी पत्नी मुझे बहुत अच्छी तरह जानती हैं। हमारी शादी को 16 साल हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पता है कि मैं क्या और कहां से लिखता हूं। कभी-कभी वह पूछती हैं, “तुमने प्यार के बारे में इतना सब कब लिखा?” मैं कहता हूं, “बहुत पहले।” फिर वह पूछती हैं कि ठीक कब लिखा था, तो सच कहूं तो मुझे खुद याद नहीं रहता।

अगर मैं किसी को बहुत प्यार में देखता हूं तो कभी-कभी मुझे भी जलन होती है लेकिन अब मैं चाहता हूं कि हर किसी की शादी हो जाए ! पहले जब मैं कुंवारा था, तब सोचता था कि कोई शादी न करे।

आपने प्यार में जलन यानी jealousy की बात भी की है। क्या आपको लगता है कि प्यार में थोड़ी जलन जरूरी है ?

थोड़ी-बहुत तो शायद होती है। अगर मैं किसी को बहुत प्यार में देखता हूं तो कभी-कभी मुझे भी जलन होती है लेकिन अब मैं चाहता हूं कि हर किसी की शादी हो जाए ! पहले जब मैं कुंवारा था, तब सोचता था कि कोई शादी न करे। अब शादी का अनुभव हो गया है तो मैं चाहता हूं कि सब शादी करें। जिंदगी में हर तरह की भावनाएं होनी चाहिए। सिर्फ खुशी ही काफी नहीं है। थोड़ा दर्द, थोड़ा ड्रामा और बाकी सभी भावनाएं भी जरूरी हैं। यही जिंदगी को पूरा बनाती हैं। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मेरी पत्नी बहुत अच्छी हैं और अब हमारी बेटी भी है। इससे ज्यादा और क्या चाहिए ?

एक खूबसूरत लाइन है कि प्यार से ज्यादा किसी ने जानें नहीं लीं

आपने एक बार कहा था कि आपने दुश्मनों से ज्यादा नुकसान प्यार में उठाया है। क्या आज भी आप इस बात पर कायम हैं ?

बिल्कुल। मैंने प्यार में ज्यादा खोया है। एक खूबसूरत लाइन है कि प्यार से ज्यादा किसी ने जानें नहीं लीं। प्यार अपने आप में जहर के साथ लगाया गया एक दांव जैसा है। प्यार आपको कमजोर और संवेदनशील बनाता है, लेकिन शायद यही उसकी खूबसूरती भी है।

माध्यम बदल गया है, लेकिन भावनाएं नहीं बदलीं। हम कब तक सिर्फ एक ही तरह के विषयों पर बात करेंगे? हमने बीयर, बारिश और चाय जैसे विषयों पर भी एपिसोड किए हैं।

पहले कविता और शायरी महफिलों, शादियों और शामियानों का हिस्सा हुआ करती थी। आज वह सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जा रही है। इस बदलाव को आप कैसे देखते हैं ?

हर कला समय के साथ बदलती है। पहले फिल्में थीं, फिर टेलीविजन आया, उसके बाद OTT और वेब का दौर आया। उसी तरह कविता को भी विकसित होना चाहिए। पहले हम किसी महफिल में बैठकर कविता सुनते थे। आज लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वही काम कर रहे हैं। माध्यम बदल गया है, लेकिन भावनाएं नहीं बदलीं। हम कब तक सिर्फ एक ही तरह के विषयों पर बात करेंगे? हमने बीयर, बारिश और चाय जैसे विषयों पर भी एपिसोड किए हैं। आने वाले समय में कई शानदार और अलग तरह के एपिसोड आने वाले हैं।

हम ऐसे लोगों को भी बुलाते हैं जो शायद बहुत बड़े नाम न हों, लेकिन उनके पास कहने के लिए कुछ दिलचस्प हो। मेरे लिए यह बहुत जरूरी है। मैं नहीं चाहता कि शो सिर्फ सेलिब्रिटीज तक सीमित रहे।

आपके शो में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मेहमान नजर आते हैं। क्या इतनी विविधता जानबूझकर रखी गई है?

हां, और यही शो को खास बनाता है। हमारे साथ डांस, फूड, कॉमेडी, एक्टिंग और मॉडलिंग से जुड़े लोग आए हैं। टेरेंस लुईस, शेफ रणवीर बराड़, स्टैंड-अप कॉमेडियन हर्ष गुजराल, आयशा खान और कई दूसरे लोग शो का हिस्सा रहे हैं। हम ऐसे लोगों को भी बुलाते हैं जो शायद बहुत बड़े नाम न हों, लेकिन उनके पास कहने के लिए कुछ दिलचस्प हो। मेरे लिए यह बहुत जरूरी है। मैं नहीं चाहता कि शो सिर्फ सेलिब्रिटीज तक सीमित रहे। मैं अलग-अलग तरह की आवाजों को जगह देना चाहता हूं।

अगर बात समझदारी से कही जाए तो वह अपना अर्थ खोए बिना मनोरंजक भी हो सकती है। हमने राजनीतिक व्यंग्य भी किया है। कई राजनेता खुद मुझे मैसेज करके कहते हैं कि वे हमारा शो देखते हैं और उन्हें बहुत अच्छा लगता है।

शो में कविता के साथ कॉमेडी और राजनीतिक व्यंग्य भी देखने को मिलता है। इस संतुलन को आप कैसे बनाए रखते हैं ?

कविता हर चीज के बारे में बात कर सकती है। वह गंभीर हो सकती है, रोमांटिक हो सकती है, मजेदार हो सकती है या राजनीतिक भी। अगर बात समझदारी से कही जाए तो वह अपना अर्थ खोए बिना मनोरंजक भी हो सकती है। हमने राजनीतिक व्यंग्य भी किया है। कई राजनेता खुद मुझे मैसेज करके कहते हैं कि वे हमारा शो देखते हैं और उन्हें बहुत अच्छा लगता है। तो मैं उनसे कहता हूं, “फिर शो पर आइए !” कई लोगों ने आने का वादा भी किया है। अब देखते हैं कौन अपना वादा निभाता है! (हंसते हैं)

जब इंडस्ट्री का कोई व्यक्ति कविता को समझता है और उससे जुड़ता है, तो वह हमेशा खास पल होता है।

रवि किशन ने भी शो में आने में दिलचस्पी दिखाई है। उनके साथ आपकी बातचीत कैसी रही?

रवि किशन बहुत अच्छे इंसान हैं। मैं उन्हें काफी समय से जानता हूं और उनकी बहुत इज्जत करता हूं। हाल ही में एक कविता के वायरल होने के बाद उन्होंने मुझे फोन किया। उन्होंने कहा कि वह कविता उन्हें बहुत रिलेटेबल लगी। जब इंडस्ट्री का कोई व्यक्ति कविता को समझता है और उससे जुड़ता है, तो वह हमेशा खास पल होता है।

मैं ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहता हूं जो मुझे एक्साइट करें और ऐसे कलाकारों के साथ काम करना चाहता हूं जिनकी मैं इज्जत करता हूं।

आपका करियर इस समय एक दिलचस्प दौर में नजर आ रहा है। आप इस फेज को किस तरह एन्जॉय कर रहे हैं ?

मैं बहुत खुश हूं। मैं इस समय इसलिए एन्जॉय कर रहा हूं क्योंकि मैं आखिरकार वही कर रहा हूं जो मुझे सच में पसंद है। मैंने उस इंसान से शादी की है जिससे मैं प्यार करता हूं और प्रोफेशनली भी कुछ अच्छी फिल्में आने वाली हैं। मैं ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहता हूं जो मुझे एक्साइट करें और ऐसे कलाकारों के साथ काम करना चाहता हूं जिनकी मैं इज्जत करता हूं। मैंने एक प्रोजेक्ट में नाना पाटेकर के बेटे का किरदार निभाया है और दो-तीन और फिल्में आने वाली हैं, जिनमें मैं अलग-अलग तरह के किरदार निभा रहा हूं।

यही चीज मुझे एक्साइट करती है-दर्शकों को अपने अलग-अलग रूप दिखाना।

आने वाली फिल्मों के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?

तीन-चार प्रोजेक्ट हैं और सभी अलग-अलग जॉनर के हैं। मैं अलग तरह के किरदार निभा रहा हूं। कुछ में मेरा लीड या पैरेलल रोल है। मैं एक जगह विलेन का किरदार कर रहा हूं, कहीं हॉरर बेस्ड रोल है, कहीं पुलिसवाले का किरदार है और कहीं लवर बॉय का। यही चीज मुझे एक्साइट करती है-दर्शकों को अपने अलग-अलग रूप दिखाना।

अगर कोई किरदार मेरे लिए नेचुरल हो, लेकिन फिर भी दर्शकों को सरप्राइज करे, तो इससे अच्छी बात और क्या होगी?

आपने अक्सर कॉमिक या मामा के किरदार निभाए हैं। क्या आगे भी ऐसे रोल करना पसंद करेंगे?

बिल्कुल। अगर किरदार अच्छा है तो क्यों नहीं ? मैंने पहले अंकल टाइप का किरदार भी निभाया है और रोमांटिक रोल भी किया है। वह अनुभव भी काफी मजेदार था। लेकिन अब मैं दर्शकों को अपने अलग-अलग पहलू दिखाना चाहता हूं। अगर कोई किरदार मेरे लिए नेचुरल हो, लेकिन फिर भी दर्शकों को सरप्राइज करे, तो इससे अच्छी बात और क्या होगी?

मुझे नेचुरल या विनम्र दिखने के लिए एक्टिंग नहीं करनी पड़ती। अगर आप नेचुरल बनने की एक्टिंग करेंगे तो लोग उसे पकड़ लेंगे। इसलिए मैं बस खुद रहना पसंद करता हूं।

क्या आपको लगता है कि यह वह दौर है जब आप आखिरकार अपनी वह पहचान बना रहे हैं, जिसे आप हमेशा से दिखाना चाहते थे ?

मुझे लगता है कि हां। जो लोग मुझे निजी तौर पर जानते हैं, वे पहले से जानते हैं कि परितोष त्रिपाठी कैसा इंसान है। अब इस शो के जरिए दर्शक भी उसी परितोष को देख रहे हैं। पहली बार मैं कोई किरदार नहीं निभा रहा हूं। मैं खुद परितोष बनकर सामने आ रहा हूं।

मेरी जिस तरह की कॉमेडी है, मैंने जो किताबें पढ़ी हैं, जो चीजें मुझे पसंद हैं और जो मैंने लिखा है,वही सब इस शो में स्वाभाविक रूप से आ रहा है। मुझे नेचुरल या विनम्र दिखने के लिए एक्टिंग नहीं करनी पड़ती। अगर आप नेचुरल बनने की एक्टिंग करेंगे तो लोग उसे पकड़ लेंगे। इसलिए मैं बस खुद रहना पसंद करता हूं।

हमें लेखकों और कवियों को सम्मान देना चाहिए। वे वर्षों से शानदार काम कर रहे हैं और अब उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म मिल रहा है, जहां लोग उनकी बात सुन रहे हैं।

आपका शो कई युवा कवियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचा रहा है। आप उन्हें चुनते कैसे हैं ?

हम वीडियो, कॉन्टेस्ट और अलग-अलग परफॉर्मेंस देखते हैं लेकिन जितना मेरे बस में होता है, मैं लोगों को मौका देने की कोशिश करता हूं। खासकर उन कवियों को जो छोटे शहरों से आते हैं और जिन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने का मौका आसानी से नहीं मिलता। एक कवि ने मुझे बताया कि उसने शो की वजह से पहली बार फ्लाइट में सफर किया। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई। हमें लेखकों और कवियों को सम्मान देना चाहिए। वे वर्षों से शानदार काम कर रहे हैं और अब उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म मिल रहा है, जहां लोग उनकी बात सुन रहे हैं।

जब तक लोग सुनना और देखना चाहते रहेंगे, यह सफर चलता रहेगा।

क्या आपको लगता है कि आज की युवा पीढ़ी कविता में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है ?

बिल्कुल। आज के युवा बहुत अच्छा लिख रहे हैं। कविता हर तरह से वायरल हो रही है। मुझे सच में लगता है कि हर इंसान के अंदर एक कवि होता है। हर कोई लिखता नहीं है, लेकिन हर किसी के अंदर भावनाएं, अनुभव और कहानियां होती हैं। जब तक लोग सुनना और देखना चाहते रहेंगे, यह सफर चलता रहेगा।

हमारे देश में कवियों की कोई कमी नहीं है। इतनी सारी कहानियां और आवाजें हैं, जिन्हें सामने लाने की जरूरत है।

आप 52 एपिसोड का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। इसके आगे क्या प्लान है?

52 पर क्यों रुकें? अगर लोग इतना प्यार दे रहे हैं तो रुकने की जरूरत ही क्या है? हमारे देश में कवियों की कोई कमी नहीं है। इतनी सारी कहानियां और आवाजें हैं, जिन्हें सामने लाने की जरूरत है। मेरे DMs ऐसे लोगों से भरे रहते हैं जो अपना काम भेजते हैं। जब तक दर्शक चाहते हैं, हम इसे आगे बढ़ाते रहेंगे।

कोई आपके पास खुशी लेकर नहीं आएगा। आपको खुद अपनी खुशी तलाशनी होगी। और सबसे जरूरी बात-खुद बने रहिए। यही आपका USP है। पहले खुद से प्यार कीजिए, फिर भगवान से। मेरा मानना है कि खुद से प्यार करना बहुत जरूरी है।

आखिर में अपने दर्शकों को क्या संदेश देना चाहेंगे ?

हर दिन जीएं। मस्ती करें और अपनी जिंदगी का आनंद लें। लोग कहते हैं, “Enjoy yourself”, लेकिन सच्चाई यह है कि कोई आपके पास खुशी लेकर नहीं आएगा। आपको खुद अपनी खुशी तलाशनी होगी। और सबसे जरूरी बात-खुद बने रहिए। यही आपका USP है। पहले खुद से प्यार कीजिए, फिर भगवान से। मेरा मानना है कि खुद से प्यार करना बहुत जरूरी है। मैं भी करता हूं-मैं तो खुद को दो बार किस भी कर लेता हूं! (हंसते हैं ) तो बस खुद बने रहिए, अपनी जिंदगी का आनंद लीजिए और मुस्कुराते रहिए।

लिपिका वर्मा

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