प्रश्न : आपकी फिल्म ' उत्तर दा पुत्तर' का कॉन्सेप्ट काफी दिलचस्प है। अपने किरदार और फिल्म के बारे में कुछ बताइए ।
अन्नू कपूर : अपने किरदार के बारे में बताने से पहले मैं फिल्म की मूल कहानी बताना चाहूंगा। 'उत्तर दा पुत्तर' एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अपनी परिस्थितियों और अलग-अलग लोगों के साथ होने वाली घटनाओं के बीच संघर्ष करता है । मेरा किरदार विरोधाभासों से भरा हुआ है। एक तरफ वह भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) का प्रसिद्ध प्रोफेसर है और एक कोचिंग सेंटर चलाता है, वहीं दूसरी तरफ वह ज्योतिष, अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी), वास्तु और अन्य रहस्यमयी विद्याओं पर गहरा विश्वास करता है। यही अंधविश्वास उसके निजी जीवन में कई समस्याएँ पैदा करता है। फिल्म इसी संघर्ष और उससे बाहर निकलने की उसकी यात्रा को दिखाती है ।
अंधविश्वास केवल भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद है।
प्रश्न: फिल्म इंडस्ट्री में कई लोग ज्योतिष, वास्तु और न्यूमरोलॉजी पर विश्वास करते हैं। असल जिंदगी में अन्नू कपूर कितने अंधविश्वासी हैं?
अन्नू कपूर : बिल्कुल भी नहीं। व्यक्तिगत रूप से मैं इन चीज़ों पर विश्वास नहीं करता । लेकिन मैं यह समझता हूँ कि लोग ऐसा क्यों करते हैं। अंधविश्वास केवल भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद है। अरब देशों में काला जादू, अफ्रीका में वूडू और लैटिन अमेरिका में भी ऐसी परंपराएँ रही हैं। यह इंसानी दिमाग की जटिलता और जीवन में सुख तथा निश्चितता पाने की उसकी कोशिश को दर्शाता है।
मैंने कीरो और लिंडा गुडमैन जैसे लेखकों की किताबें भी पढ़ीं । इन विषयों में कुछ रोचक संयोग देखने को मिलते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
प्रश्न : क्या आपने कभी ज्योतिष या न्यूमरोलॉजी का अध्ययन किया है ?
अन्नू कपूर : हां, युवावस्था में जिज्ञासा के कारण मैंने ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान और न्यूमरोलॉजी के बारे में पढ़ा था। मैंने कीरो और लिंडा गुडमैन जैसे लेखकों की किताबें भी पढ़ीं । इन विषयों में कुछ रोचक संयोग देखने को मिलते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। कीरो जैसे प्रसिद्ध ज्योतिषी भी अपनी मृत्यु का पूर्वानुमान नहीं लगा पाए थे । इससे पता चलता है कि हर प्रणाली की अपनी सीमाएँ होती हैं। इन सबमें ज्योतिष, जो ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करता है, अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित विषय है। ग्रहों की स्थिति पर्यावरण को प्रभावित करती है और पर्यावरण का प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है।
दुनिया की समस्या अंततः भारत की भी समस्या बनती है। इसलिए हमें वैश्विक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए
प्रश्न: आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से जूझ रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?
अन्नू कपूर : दुनिया भर में मौसम तेजी से बदल रहा है। मुंबई में मानसून देर से आया और फिर भारी बारिश व बाढ़ जैसी स्थिति बन गई । यूरोप में भीषण गर्मी है, कई जगह ट्राम की पटरियाँ तक पिघल रही हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों का असर भी पूरी दुनिया पर पड़ता है। दुनिया की समस्या अंततः भारत की भी समस्या बनती है। इसलिए हमें वैश्विक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए ।
प्रश्न: क्या यह कहा जा सकता है कि 'उत्तर दा पुत्तर' विज्ञान और अंधविश्वास के बीच टकराव को दर्शाती है?
अन्नू कपूर : बिल्कुल । फिल्म का मूल संघर्ष यही है कि एक फिजिक्स का प्रोफेसर स्वयं अंधविश्वासों में डूबा हुआ है। यही विरोधाभास उसके निजी जीवन और रिश्तों को प्रभावित करता है।
प्रश्न: आपने अपने करियर में हर तरह के किरदार निभाए हैं। आज किसी भूमिका का चुनाव कैसे करते हैं?
अन्नू कपूर : मेरे लिए दो बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं-फिल्म की कहानी और मेरा किरदार । अगर कहानी दमदार है और मेरा रोल मजबूत है, तो मुझे अपनी फीस पाँच या दस गुना कम मिलने से भी कोई परेशानी नहीं होती। हम चरित्र कलाकारों के लिए अच्छी कहानी और अच्छा किरदार ही सबसे बड़ी पूँजी है । मैंने कभी यह नहीं सोचा कि फिल्म में बड़ा स्टार है या छोटा। मेरे लिए सिर्फ अच्छा काम मायने रखता है ।
प्रश्न: लोग मानते हैं कि आपने कई बार अपनी अदाकारी से बड़े सितारों को भी कड़ी टक्कर दी है। स्टारडम को आप कैसे देखते हैं?
अन्नू कपूर : मैं सिर्फ ईमानदारी से अपना काम करता हूँ। मेरी असली ताकत मेरी कला, मेरी क्षमता और मेरी प्रतिभा है। मैं हर किरदार को पूरी तरह जीने की कोशिश करता हूँ। बस यही मेरा काम है।
प्रश्न: आपकी आने वाली फिल्मों के बारे में बताइए ।
अन्नू कपूर : मेरी एक फिल्म 'अमृत' निर्माणाधीन है। सही समय आने पर मैं उसके बारे में विस्तार से बात करूँगा। फिलहाल मैं दर्शकों से सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि 'उत्तर दा पुत्तर' जैसी छोटी लेकिन अच्छी फिल्मों को भी मौका दीजिए। अगर कंटेंट अच्छा होगा तो दर्शक उसे जरूर स्वीकार करेंगे।
प्रश्न : कंटेंट आधारित फिल्मों के लिए आज के दौर में थिएटर तक पहुंचना कितना मुश्किल हो गया है?
अन्नू कपूर : जीवन स्वयं एक संघर्ष है। अस्तित्व ही सबसे बड़ी लड़ाई है। मैं सिर्फ दर्शकों से अपील कर सकता हूं कि वे सिनेमाघरों में जाएं और अच्छी फिल्मों का समर्थन करें ।
प्रश्न: क्या आपको पता है कि 'उत्तर दा पुत्तर' कितने सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी?
अन्नू कपूर : इसका सही जवाब निर्माता या निर्देशक ही दे सकते हैं। मुझे स्क्रीन की संख्या नहीं मालूम, लेकिन इतना निश्चित है कि फिल्म 24 जुलाई 2026 को पूरे देश में रिलीज़ होगी ।
प्रश्न : दर्शक आपको एक होस्ट के रूप में भी बहुत मिस करते हैं। क्या फिर से टीवी पर वापसी होगी?
अन्नू कपूर : अभी तक वैसी पेशकश नहीं मिली थी जो मुझे पसंद आए। लेकिन अब कुछ बातचीत चल रही है। समय आने पर आप सबको इसकी जानकारी मिल जाएगी।
प्रश्न : आज की युवा पीढ़ी के लिए आपका क्या संदेश है, जो जल्दी सफलता और जल्दी पैसा कमाना चाहती है ?
अन्नू कपूर : जल्दी पैसा कमाने के कई तरीके हो सकते हैं। लेकिन अगर पैसा गैरकानूनी तरीके से कमाया गया है, तो देर-सबेर कानून आपको पकड़ ही लेगा। अगर आपकी सफलता आपकी बुद्धि, मेहनत और ईमानदारी से आती है, तो मैं आपको शुभकामनाएं देता हूं। लेकिन अगर वह अपराध के रास्ते से आती है, तो उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा । मेहनत कीजिए, ईमानदारी से काम कीजिए और सफलता का सही आनंद लीजिए। - लिपिका वर्मा