नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार सूर्यकुमार यादव का भारत की T-20 टीम के कप्तान के तौर पर भविष्य मुख्य रूप से मुख्य कोच गौतम गंभीर ही तय कर सकते हैं क्योंकि राष्ट्रीय चयन समिति पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है कि वह सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में अपनी जगह बना पाएंगे। सूर्यकुमार को गंभीर ने ‘स्काय’ नाम दिया था। वह पिछले एक साल से अपनी फॉर्म पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। BCCI के भीतर यह माना जा रहा है कि चयन समिति अब सूर्यकुमार से आगे बढ़ने (उन्हें टीम से हटाने) के पक्ष में है, लेकिन बोर्ड के आला अधिकारी यह भी मानते हैं कि कोच और कप्तान के बीच का तालमेल ड्रेसिंग-रूम के माहौल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
गंभीर का सूर्यकुमार के साथ सहज महसूस करना, उन्हें इस अंतिम फैसले में एक अहम व्यक्ति बना देगा। लगभग एक साल से, सूर्यकुमार की टीम में जगह पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल, यह समझा जाता है कि सभी पांचों चयनकर्ताओं का मोटे तौर पर यही मानना है कि मौजूदा T-20 कप्तान को अंतिम एकादश से बाहर कर देना चाहिए। T-20 विश्व कप में मिली जीत का जोश ठंडा होने के बाद से ही यह राय जोर पकड़ती जा रही है। पता चला है कि चयनकर्ताओं ने अब भारतीय क्रिकेट के भविष्य को किसी एक टूर्नामेंट की चमक पर ध्यान देने के बजाय, एक व्यापक नजरिए से देखना शुरू कर दिया है।
BCCI के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया, ‘शुरुआत में चयनकर्ताओं को लगा था कि IPL से सूर्यकुमार को अपनी फॉर्म वापस पाने में मदद मिलेगी, जैसा कि पिछले सत्र में हुआ था जब उन्होंने 700 से अधिक रन बनाए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उनके खेल में तकनीकी तौर पर कोई सुधार देखने को नहीं मिला है।’ उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि सबसे अनुभवहीन तेज गेंदबाज भी सीधी और तेज गेंदें डाल रहे हैं, और उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है। चयनकर्ताओं को नहीं लगता कि वह लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में खेल पाएंगे। बात बस इतनी सी है।’ आंकड़े वाकई चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। सूर्यकुमार 12 पारियों में सिर्फ 210 रन ही बना पाए जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 148 रहा।
लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि उनका औसत 18 से भी कम रहा। ये आंकड़े आधुनिक T-20 क्रिकेट के सबसे रचनात्मक बल्लेबाजों में से एक के तौर पर उनकी जो छवि है, उसके बिल्कुल विपरीत हैं। सूत्र ने कहा, ‘अगर कोई सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर सकता, तो वह एक कप्तान कैसे बन सकता है? इसलिए उसे टीम में बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन अजीत अगरकर और गौतम को एक ही राय पर होना होगा।’ और यहीं पर असली पेंच है। गंभीर को सिर्फ नाम का मुख्य कोच बनकर काम करने की आदत नहीं है। जो लोग उनके काम करने के तरीके से परिचित हैं, वे कहते हैं कि जिस भी टीम की कमान उनके हाथ में होती है, उसमें आखिरी फैसला अक्सर उन्हीं का होता है।
इससे भी अहम बात यह है कि सूर्यकुमार के साथ उनके रिश्ते हमेशा से ही बहुत अच्छे रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अगर गंभीर सूर्यकुमार का साथ देने का फैसला करते हैं और उसे टीम से निकालने के फैसले को वीटो कर देते हैं तो चयन समिति को शायद उस फैसले को टालना पड़े, जो होना तो तय ही है। इस बीच भारतीय क्रिकेट के गलियारों में संभावित उत्तराधिकारियों के नामों की चर्चा जोरों पर है। श्रेयस अय्यर अब भी एक मजबूत दावेदार बने हुए हैं। उनके पास बेहतरीन रणनीतिक सूझबूझ और एक दमदार व्यक्तित्व है। लेकिन क्या वह और गंभीर एक साथ मिलकर बिना किसी रुकावट के काम कर पाएंगे, यह अब भी एक सवाल बना हुआ है।
लोग अय्यर की उस दबी हुई नाराजगी को अब तक नहीं भूले हैं, जो उन्हें तब हुई थी जब कोलकाता नाइट राइडर्स की 2024 IPL जीत का सारा श्रेय मेंटोर के तौर पर गंभीर को दिया जा रहा था। फिर शुभमन गिल भी हैं, जिनकी साख एक और शानदार IPL सत्र के बाद एक बार फिर से काफी बढ़ गई है। इस सीजन में उन्होंने गुजरात टाइटंस की कप्तानी बेहद शानदार तरीके से की है। दरअसल, अगरकर और उनकी टीम ने शुरुआत में गिल को ही लंबे समय के लिए तीनों प्रारूप का कप्तान बनाने के बारे में सोचा था, लेकिन T-20 विश्व कप से ठीक पहले उनकी फॉर्म में आई गिरावट की वजह से ये सारी योजना धरी की धरी रह गई। अगर सूर्यकुमार टीम से बाहर होते हैं तो T-20 टीम में गिल की वापसी की पूरी संभावना है, हालांकि इसके साथ अपनी कुछ पेचीदगियां भी जुड़ी हुई हैं।
टीम का थिंक-टैंक गिल को पारी का आगाज करते हुए, संजू सैमसन को तीसरे नंबर पर और ईशान किशन को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए देख सकता है। लेकिन युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने इस उत्तराधिकारी की पहेली को एक और दिलचस्प मोड़ दे दिया है। माना जा रहा है कि 2028 के ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। आखिर में, एक और नाम है तिलक वर्मा जिसकी चर्चा अब धीरे-धीरे क्रिकेट के बड़े और प्रभावशाली लोगों के बीच ज़ोर पकड़ रही है। सूत्र ने कहा, ‘अगर सूर्यकुमार को टीम से निकाला जाता है, तो तिलक के नाम को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करें। इसका एक कारण है कि तिलक को त्रिकोणीय ए सीरीज के लिए कप्तान बनाया गया है, जहां चयनकर्ताओं को उनके नेतृत्व कौशल को देखने का मौका मिलेगा।’