हरभजन सिंह  चित्र इंटरनेट से साभार
क्रिकेट

T-20 के दौर ने बल्लेबाजों का धैर्य कम किया : हरभजन

हरभजन सिंह का मानना है कि T-20 की आक्रामक बल्लेबाजी ने टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों का धैर्य और लंबी पारियां खेलने की क्षमता कम कर दी है, जिससे तिहरे शतकों जैसी ऐतिहासिक पारियां अब विरले ही देखने को मिलती हैं

नयी दिल्ली : पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा है कि T-20 के दौर से विकसित आक्रामक बल्लेबाजी शैली की कीमत बल्लेबाजों को अपने धैर्य से चुकानी पड़ी है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों द्वारा खेली जा रही लंबी पारियों की घटती संख्या की ओर इशारा किया। उन्होंने पिछली पीढ़ी के टेस्ट बल्लेबाजों को याद किया जो आक्रामकता के साथ लंबे समय तक बल्लेबाजी करने और बड़े स्कोर खड़े करने की क्षमता रखते थे। हरभजन ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘T-20 के इस दौर में मौजूदा पीढ़ी के बल्लेबाजों में पहले के बल्लेबाजों जैसा धैर्य नहीं है। बहुत कम बल्लेबाज ऐसे हैं जो टिककर खेल सकें और एक पारी में 250 या 300 रन बना सकें क्योंकि अगर आप इतने ज्यादा शॉट खेलेंगे तो आउट होने का खतरा हमेशा रहेगा। आजकल टेस्ट में किसी बल्लेबाज को तिहरा शतक बनाते हुए बहुत ही कम देखा जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘पहले ब्रायन लारा थे, फिर क्रिस गेल, वीरेंद्र सहवाग और मैथ्यू हेडन, इन सभी ने तिहरे शतक लगाए। लारा ने 400 रन बनाए। एबी डिविलियर्स और जाक कैलिस भी थे जिन्होंने बड़े दोहरे शतक लगाए।’

टेस्ट क्रिकेट में हाल में तिहरा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों में पाकिस्तान के अजहर अली (2016), ऑस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर (2019), इंग्लैंड के हैरी ब्रूक (2024) और दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर (2025) शामिल हैं। यह इस बात को रेखांकित करता है कि अब ऐसी पारियां कितनी कम देखने को मिलती हैं। हरभजन ने कहा, ‘जब हमने क्रिकेट खेलना शुरू किया था तब खेल की रफ्तार थोड़ी धीमी थी, हालांकि वह उस समय के अनुरूप थी। तब केवल कुछ ही बल्लेबाज छक्कों पर भरोसा करते थे।’ भारत के लिए 1998 में पदार्पण करने वाले हरभजन ने कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में टेस्ट बल्लेबाजी के प्रति अपने रवैये के मामले में ऑस्ट्रेलिया बाकी टीमों से आगे था। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं 2001 से देखूं तो ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी टीम थी जो टेस्ट में तेजी से रन बनाती थी और अपने समय से आगे थी।

बाकी टीमें सामान्य क्रिकेट खेलती थीं और एक दिन में 250 रन बनाती थीं, जबकि ऑस्ट्रेलिया हर बार एक दिन में 350 रन बनाने के बारे में सोचता था। उनका दबदबा था।’ उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में आई तेजी ने गेंदबाजों, खासकर स्पिनरों को भी लगातार आक्रामक होती बल्लेबाजी के अनुरूप खुद को ढालने के लिए मजबूर किया। हरभजन ने कहा, ‘जैसे-जैसे मैंने अधिक क्रिकेट खेला, हर साल टेस्ट क्रिकेट भी आगे बढ़ता गया और खेल की रफ्तार तेज होती गई। स्पिनरों को भी अधिक सजग रहने की जरूरत पड़ी। अगर आप आक्रामक खेल के खिलाफ खुद को समय के साथ नहीं ढालते तो पीछे रहना तय था।’ इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा कि गेंदबाजों को अब अलग तरीके से सोचना होगा और आक्रामक बल्लेबाजों को उनके पसंदीदा शॉट खेलने से रोकने के तरीके तलाशने होंगे। उन्होंने कहा, ‘आपको अलग योजना और अलग मानसिकता के साथ आना होगा।

आपको लगातार डॉट गेंदें डालकर दबाव बनाना होगा और बल्लेबाज को अलग तरह का शॉट खेलने के लिए मजबूर करने की कोशिश करनी होगी।’ हरभजन ने कहा, ‘2001 से अब तक टेस्ट क्रिकेट में टीमों के खेलने के तरीके में पूरी तरह बदलाव आया है। अगर आप देखें कि इंग्लैंड टेस्ट (बैजबॉल) कैसे खेलता है, तो वह एक दिन में 500 रन बनाने की कोशिश करता है और इसी कोशिश में 70 या 80 रन पर भी ऑल आउट हो सकता है।’ खेल के बदलते स्वरूप को स्वीकार करते हुए भी हरभजन ने कहा कि उन्हें टेस्ट मैच में पहले वाली अनिश्चितता की कमी खलती है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन मेरा मानना है कि टेस्ट क्रिकेट का आकर्षण उस दौर में था जब हम खेलते थे। मैच पांच दिन तक चलता था और पांचवें दिन तक यह पता नहीं होता था कि कौन सी टीम जीतेगी।’

हरभजन का यह भी मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग के बढ़ते प्रभाव ने युवा क्रिकेटरों के लिए प्रोत्साहन के स्वरूप को बदल दिया है। आकर्षक T-20 टूर्नामेंट खिलाड़ियों को पहचान और आर्थिक लाभ हासिल करने का तेज रास्ता उपलब्ध कराता है। उनका मानना है कि इससे लाल गेंद के क्रिकेट से ध्यान कुछ हद तक हटा है। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि लाल गेंद से सफेद गेंद क्रिकेट की ओर ध्यान थोड़ा खिसका है। इसका कारण यह है कि IPL एक बहुत बड़ा मंच है, जो खिलाड़ी को पहचान के साथ-साथ बड़ी रकम भी दिलाता है। आप रातोंरात स्टार बन जाते हैं और इससे पहले कि आपको पता चले, आप भारत के लिए खेल रहे होते हैं।’ इस पूर्व ऑफ स्पिनर ने कहा, ‘पहले के समय में लोग भारत के लिए खेलने के लिए 10 साल तक भी मेहनत करते थे। अमोल मजूमदार और अमरजीत केपी जैसे कई खिलाड़ी थे जिन्होंने काफी रन बनाए लेकिन भारत के लिए नहीं खेल सके क्योंकि सीनियर टीम में जगह नहीं थी।’ हरभजन ने कहा, 'लेकिन अब तीन प्रारूप हैं इसलिए भारत के लिए खेलने के ज्यादा मौके हैं।’

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