नयी दिल्ली : भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि ‘पावर हिटर’ ईशान किशन को T-20 विश्व कप टीम में चुनने का फैसला विशुद्ध रूप से मन की आवाज पर लिया गया था क्योंकि उन्हे महसूस हुआ था कि बिहार के इस बल्लेबाज में ‘एक्स फैक्टर’ है जो मैचों में निर्णायक साबित हो सकता है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार से पूछा गया था कि वह आंकड़ों पर चलने वाले कप्तान हैं या मन की आवाज सुनते हैं और जितेश शर्मा की बजाय ईशान के चयन के फैसले की क्या वजह थी। उन्होने कहा,‘यह बिल्कुल मन की आवाज पर लिया गया फैसला था। उस समय जितेश शर्मा के लिये यह काफी कठिन था क्योंकि वह एक साल से अधिक समय से टीम के साथ था। और वह खेल रहा था, अगर नहीं खेल रहा होता तो कहानी अलग होती।’
भारत को आठ मार्च को T-20 विश्व कप 2026 जिताने वाले कप्तान सूर्यकुमार ने अपने कैरियर, भारतीय क्रिकेट के भविष्य, मुख्य कोच गौतम गंभीर और टीम से अपने संबंधों पर तफ्सील से बात की। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बल्लेबाजी प्रतिक्रिया और सहजता का मिला जुला रूप है। उन्होंने कहा,‘मैं भी बहुत दु:खी था जब हमने जितेश को छोड़कर ईशान को चुना लेकिन हमें ऐसे सलामी बल्लेबाज की जरूरत थी जो शीर्ष क्रम पर आक्रामक प्रदर्शन कर सके। ऐसे में किसी को तो बाहर रहना था।’ उन्होंने बताया कि ईशान कैसे टीम में आये, उन्होंने ईशान को फोन करके कहा, ‘छोटू, विश्व कप जितायेगा’, इस पर ईशान ने जवाब दिया, ‘भरोसा करोगे’ और इस पर सूर्यकुमार ने कहा ‘चल किया ’।
सूर्यकुमार ने कहा, ‘और उसने जो प्रदर्शन किया, वह अद्भुत था। मुझे हमेशा से लगता था कि वह एक्स फैक्टर हो सकता है क्योंकि उस पर कोई दबाव नहीं था।’ उन्होंने कहा कि ईशान खराब दौर से गुजर रहा था और टीम से बाहर था लेकिन खेल में बने रहने के लिये वह पूरे भारत में छोटे-छोटे मैच खेला और अभ्यास मैच भी खेला। ईशान ने अपने कप्तान को निराश नहीं किया और नौ मैचों में 190 से ऊपर की स्ट्राइक रेट से 317 रन बनाये। पैतीस वर्ष के सूर्यकुमार ने घरेलू क्रिकेट नहीं खेलने पर टीम से बाहर किये जाने के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर ईशान की प्रतिबद्धता की तारीफ की। ईशान ने इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में 18 गेंद में 39 रन बनाने के बाद फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ अर्द्धशतक जमाया।
भारत की खिताबी जीत में एक और फैसला निर्णायक साबित हुआ और वह था पारी की शुरुआत का मौका संजू सैमसन को देना। केरल के इस बल्लेबाज ने सेमीफाइनल और फाइनल में 89 रन बनाये और ‘प्लेयर आफ द टूर्नामेंट’ रहे । सूर्यकुमार ने कहा, ‘संजू सैमसन के टीम में आने के बाद सब कुछ बदल गया। यह रणनीतिक फैसला भी था क्योंकि शीर्ष पर तीन खब्बू बल्लेबाज थे। इससे विरोधी टीम को अपने आफ स्पिनरों को उतारना आसान हो रहा था। संजू को सही समय पर टीम में लिया गया और जिस तरह से उसने खेला, वह इसका हकदार था।’ ’
उन्होंने कहा कि संजू लगातार मेहनत कर रहा था और कइयों को पता भी नहीं होगा कि उसके भीतर क्या चल रहा था। उन्होंने कहा, ‘लेकिन जिस तरह से वह खेला और प्लेयर आॅफ द टूर्नामेंट रहा, वह शानदार था। वह बेहद प्रतिभाशाली और बहुत अच्छा इंसान है। मैं हमेशा कहता हूं कि अच्छे लोगों के साथ अच्छा ही होता है। जब उसने इस विश्व कप में खेलना शुरू किया, तब से उसके साथ सब कुछ अच्छा हुआ।’ अपने फॉर्म के बारे में उन्होंने कहा,‘यह प्रतिक्रिया पर निर्भर खेल है। गेंदबाज जो भी गेंद डालता है, आप उसकी तैयारी करते हैं। बल्लेबाजी में 70 से 75 प्रतिशत प्रतिक्रिया और बाकी सहज प्रवृत्ति होती है। मैच के दिन आपको तय करना होता है कि आपसे क्या अपेक्षा है और आप उसके अनुरूप बल्लेबाजी करते हैं।