चेन्नई : पूर्व क्षेत्र ने फाइनल में पूरी तरह से बनाए दबदबे को खिताबी जीत में तब्दील करते हुए गुरुवार को यहां दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ ड्रॉ हुए मुकाबले में पहली पारी की बढ़त के आधार पर 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी अपने नाम की। पूर्व क्षेत्र ने अपनी दूसरी पारी में सात विकेट पर 388 रन बनाए जिससे उसकी कुल बढ़त 760 रन तक पहुंच गई। इसके बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया। मोहम्मद कोनेन कुरैशी ने इस मुकाबले में शतक बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने नाबाद 116 रन बनाए जो उनके केवल दो मैच पुराने प्रथम श्रेणी करियर का पहला शतक है। कुरैशी ने अनुकूल रॉय (64) के साथ सातवें विकेट के लिए 150 रन की साझेदारी की। उन्होंने बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद की गेंद पर दो रन लेकर 179 गेंद में अपना शतक पूरा किया।
हालांकि दोनों टीम के खिलाड़ियों के दोपहर दो बजकर 10 मिनट पर हाथ मिलाने और मैच ड्रॉ घोषित होने से काफी पहले ही पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन बनाकर खिताब लगभग तय कर लिया था। इस विशाल स्कोर की बदौलत टीम ने पहली पारी में 372 रन की बढ़त हासिल की थी। पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में भी दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को बेअसर साबित किया। पांच विकेट पर 212 रन से दिन की शुरुआत करने वाली इशान किशन की अगुवाई वाली टीम को पहली पारी की तरह ही दिशाहीन गेंदबाजी कर रहे दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाज अधिक परेशान नहीं कर पाए। अनुभवी मोहम्मद सिराज कुछ समय के लिए पूरे जोश, तेजी और आक्रामकता के साथ गेंदबाजी करने आए।
व्यक्तिगत रूप से उनका प्रयास संतोषजनक रहा लेकिन टीम के लिहाज से वह बेअसर साबित हुए। सिराज को दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला और दक्षिण क्षेत्र का कमजोर बल्लेबाजी प्रदर्शन भी उसके टीम चयन की खामियों को उजागर करता है। दक्षिण क्षेत्र प्रबंधन ने करुण नायर, मयंक अग्रवाल और साई किशोर जैसे फॉर्म में चल रहे तथा अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया और उनकी जगह शामिल किए गए खिलाड़ी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। इसके विपरीत पूर्व क्षेत्र के कई खिलाड़ियों ने अवसर का पूरा फायदा उठाया। कप्तान किशन ने पहली पारी में शानदार 270 रन बनाकर लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी तैयारी का मजबूत संकेत दिया।
वहीं अपने 100वें प्रथम श्रेणी मैच में खेल रहे अनुभवी मोहम्मद शमी ने भी जुझारू प्रदर्शन करते हुए कुछ युवा खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। कुमार कुशाग्र ने छठा प्रथम श्रेणी शतक लगाया जबकि झारखंड के उनके साथी शिखर मोहन ने तकनीक और संयम से भरी शानदार अर्द्धशतक पारी खेली। किशन की कप्तानी भी शानदार रही। टीम के विशाल स्कोर खड़ा करने के बाद टीम का प्राथमिक लक्ष्य स्पष्ट था, दक्षिण क्षेत्र के सभी 10 विकेट हासिल करना और पहली पारी की बढ़त सुनिश्चित करना। किशन ने अपनी रणनीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि जब आप टीम के कप्तान होते हैं तो सबसे पहली चीज परिस्थितियों को समझना होती है।
हमने लगभग दो दिन बल्लेबाजी की। अब एक इकाई के तौर पर हम जानते थे कि यह मूल रूप से पहली पारी का मुकाबला है।’ किशन ने कहा, ‘इसलिए हमारा मुख्य काम उन 10 विकेट को चटकाना और बढ़त हासिल करना था। अगर हमारे पास पहली पारी की बढ़त (खिताब जीतने के लिए पर्याप्त) है तो मैं इस तपती गर्मी में दोबारा मैदान पर क्यों उतरना चाहूंगा?’ उनके इस बयान ने घरेलू नॉकआउट मुकाबलों को पांच दिन तक खींचकर नतीजा हासिल करने के उद्देश्य और सिर्फ पहली पारी में बढ़त लेकर खिताब जीतने की रणनीति के बीच के विरोधाभास को उजागर किया।