मुंबई :
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बिकवाली लौटने से निवेशकों की संपत्ति में करीब 3.73 लाख करोड़ की कमी आ गई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी और मौद्रिक नीति रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ करने के बाद बाजार में दबाव बढ़ा। नीतिगत ब्याज दर (रेपो) में करीब चार साल बाद पहली बार बढ़ोतरी होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशक धारणा प्रभावित होने के कारण स्थानीय शेयर बाजार लगातार दो दिन की तेजी के बाद बुधवार को गिरकर बंद हुए। सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 पर, जबकि निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत टूटकर 22,603.05 पर बंद हुआ।बीएसई के मुताबिक बुधवार के कारोबार के अंत में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4,71,01,915 करोड़ रहा। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ने कुछ संभलने की कोशिश की, लेकिन बाद में कमजोर रुपये और महंगे कच्चे तेल ने धारणा बिगाड़ दी। व्यापक बाजार में भी बिकवाली रही और स्मॉलकैप व मिडकैप सूचकांक दबाव में रहे। मीडिया और पीएसयू बैंक को छोड़कर अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। ऑटो, मेटल, FMCG, आईटी और ऑयल एंड गैस शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 26 के शेयर नुकसान में रहे। टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, लार्सन एंड टुब्रो और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में प्रमुख रूप से गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर लाभ में रहे।RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। केंद्रीय बैंक ने नीति रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है, जिससे निकट भविष्य में दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।बाजार पर कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी ने भी दोहरी मार की। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि रुपया करीब 96.85 प्रति डॉलर के पांच महीने के निचले स्तर तक फिसला।वैश्विक स्तर पर भी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल चिंता बढ़ा रहा है। अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बुधवार को करीब 5.70 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। महंगा तेल, बढ़ती सरकारी उधारी और ऊंची वैश्विक ब्याज दरों ने दुनिया भर में पूंजी की लागत बढ़ा दी है।इन घरेलू और वैश्विक दबावों के बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। अब निवेशकों की नजर महंगाई, कच्चे तेल, रुपये और आगे RBI की दर नीति पर रहेगी।