नई दिल्ली :
देश में फैक्टरी कर्मचारियों की औसत सालाना कमाई 2024-25 में 5.3 प्रतिशत बढ़कर 2.28 लाख रुपये पहुंच गई, लेकिन झारखंड ऐसा इकलौता राज्य रहा, जहां मजदूरों की औसत मजदूरी में गिरावट दर्ज की गई। ताजा वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार, झारखंड में प्रति कर्मचारी औसत मजदूरी 5.2 प्रतिशत घटकर 3.04 लाख रुपये रह गई। हालांकि, यह अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। झारखंड में मजदूरी 2022-23 में 3.17 लाख और 2023-24 में 3.20 लाख रुपये रही थी। इस लिहाज से मौजूदा गिरावट को पिछले दो वर्षों के ऊंचे स्तर के बाद सामान्य सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य में फैक्टरी कर्मचारियों की संख्या हालांकि 9 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख हो गई, जबकि कारखानों की संख्या नौ घटकर 2,880 रही।पड़ोसी राज्य बिहार में मजदूरी सबसे तेज 16.7 प्रतिशत बढ़ी और औसत सालाना कमाई 1.63 लाख रुपये हो गई। राज्य में कारखानों की संख्या एक प्रतिशत बढ़कर 3,426 हुई, जबकि फैक्टरी कर्मचारियों की संख्या दो प्रतिशत घटकर 1.15 लाख रह गई।एएसआई के मुताबिक 2024-25 में देश में कारखानों की संख्या 2.6 प्रतिशत बढ़कर 2.7 लाख हो गई। लगातार दूसरी बार 2 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज हुई है। फैक्टरी कर्मचारियों की संख्या भी 7.3 प्रतिशत बढ़कर 1.67 करोड़ पहुंच गई।राज्यों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश में कारखानों की संख्या सबसे तेज 12.8 प्रतिशत बढ़कर 24,964 हुई। हालांकि, तमिलनाडु 41,221 कारखानों के साथ पहले स्थान पर बना रहा। गुजरात में 33,084 और महाराष्ट्र में 27,379 कारखाने रहे।तमिलनाडु में फैक्टरी कर्मचारियों की संख्या 5 प्रतिशत बढ़कर 26.1 लाख हुई। उत्तर प्रदेश में इसमें 14 प्रतिशत और हरियाणा में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मजदूरी के मामले में उत्तर प्रदेश में 6.7 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 6.1 प्रतिशत और तमिलनाडु में 5.6 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि गुजरात में यह वृद्धि केवल 2 प्रतिशत रही। एएसआई औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र को कवर करता है और इसके आंकड़ों का इस्तेमाल जीडीपी अनुमान तथा नीति निर्माण में किया जाता है।