नई दिल्ली :
केंद्र सरकार ने देश के इस्पात उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय इस्पात नीति-2047 का मसौदा जारी किया है। इसमें वर्ष 2047 तक कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता 60.4 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही तैयार इस्पात की मांग 50.5 करोड़ टन, प्रति व्यक्ति खपत 302 किलोग्राम और निर्यात 4.5 करोड़ टन तक पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।मसौदे के अनुसार, कच्चे माल की लागत इस्पात उत्पादन की कुल लागत का लगभग 65 से 70 प्रतिशत होती है। भारत लौह अयस्क के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर है, लेकिन कोकिंग कोयले की करीब 92 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है। इस निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू खनन, कोल वॉशरी की क्षमता बढ़ाने, विदेशों में खनन परिसंपत्तियां हासिल करने, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते करने और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित कोयला मिश्रण को बढ़ावा देने की योजना है। मैंगनीज और चूना पत्थर जैसे खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा।नीति में द्वितीयक इस्पात क्षेत्र की करीब 2,550 इकाइयों को कच्चे माल, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और कार्यस्थल सुरक्षा के लिहाज से मजबूत बनाने का प्रस्ताव है। ये इकाइयां देश की कच्चे इस्पात की कुल उत्पादन क्षमता में लगभग 47 प्रतिशत योगदान देती हैं।कार्बन उत्सर्जन घटाना भी प्रमुख प्राथमिकता है। भारत में प्रति टन कच्चे इस्पात पर औसतन 2.54 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है, जबकि वैश्विक औसत 1.92 टन है। ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय बिजली, कबाड़ आधारित उत्पादन और हाइड्रोजन के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर इस अंतर को कम करने की योजना है। वर्ष 2070 के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप चरणबद्ध बदलाव किए जाएंगे।सरकार स्टेनलेस और विशेष इस्पात जैसे उच्च मूल्यवर्धित उत्पादों के घरेलू निर्माण, स्क्रैप तंत्र, डाउनस्ट्रीम विनिर्माण क्लस्टर, स्वदेशी तकनीक और उत्कृष्टता केंद्रों को भी प्रोत्साहित करना चाहती है। गुणवत्ता मानकों में संशोधन, डिजिटल बुनियादी ढांचे, साझा डेटा मानकों और उद्योग 4.0 को अपनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। घटिया इस्पात के आयात पर निगरानी और गुणवत्तापूर्ण निर्यात को प्रोत्साहन जारी रहेगा।भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक और उपभोक्ता है। वर्ष 2014-15 में कच्चे इस्पात का उत्पादन 8.9 करोड़ टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 17 करोड़ टन हो गया। इसी अवधि में तैयार इस्पात की खपत 7.7 करोड़ टन से बढ़कर 16.4 करोड़ टन पहुंची। वर्ष 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति में 2030 तक 30 करोड़ टन विनिर्माण क्षमता और प्रति व्यक्ति 160 किलोग्राम खपत का लक्ष्य रखा गया था। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने हाल में एआई, मशीन लर्निंग और तकनीकी उन्नयन जैसी नई प्राथमिकताओं को देखते हुए पुरानी नीति की समीक्षा की जरूरत बताई थी।