नई दिल्ली : दुनिया के चावल बाजार के लिए 2027 चुनौतीपूर्ण साल हो सकता है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, एसएंडपी ग्लोबल के अनुमान में 2026-27 विपणन वर्ष के दौरान वैश्विक चावल उत्पादन 90 लाख टन घटकर 536.4 मिलियन टन रह सकता है। इसमें सबसे बड़ा अनिश्चित कारक मौसम है। अल नीनो के मजबूत होने की आशंका के साथ खेती और परिवहन की बढ़ती लागत तथा भू-राजनीतिक तनाव दुनिया के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों में बुवाई और फसल के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
अल नीनो का असर दुनिया के प्रमुख चावल उत्पादक और उपभोक्ता देशों पर पड़ सकता है। इनमें भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार और फिलीपींस शामिल हैं। हालांकि, सभी क्षेत्रों में इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। कहीं पानी की कमी हो सकती है तो कहीं बुवाई और फसल के विकास के दौरान खराब मौसम या खेती के रकबे में बदलाव देखने को मिल सकता है।
IREF के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने जुलाई में अनुमान लगाया था कि अल नीनो के 2027 की शुरुआत तक बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान इसके बहुत मजबूत होने की संभावना 81 प्रतिशत बताई गई है।
यदि यह स्थिति अप्रैल 2027 तक बनी रहती है, तो धान की खेती के कई चरण प्रभावित हो सकते हैं। अल नीनो के कारण कुछ क्षेत्रों में सूखा और कुछ जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है और सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर धान और मक्का समेत खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।
तत्काल ऐसा होने की संभावना नहीं है। उत्पादन में कमी के अनुमान के बावजूद वैश्विक चावल निर्यात काफी हद तक स्थिर रह सकता है, क्योंकि 2025-26 से पर्याप्त भंडार बचा हुआ है।
हालांकि, मांग बढ़ने का अनुमान है। वैश्विक चावल आयात करीब 40 लाख टन बढ़कर 59.7 मिलियन टन पहुंच सकता है। संभावित फसल नुकसान से बचने के लिए कई देश पहले से ही अपनी आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश कर सकते हैं।
वैश्विक चावल भंडार-उपयोग अनुपात के घटकर करीब 36 प्रतिशत रहने का अनुमान है। IREF के अनुसार, ऐतिहासिक मानकों के लिहाज से यह स्तर अभी भी संतोषजनक माना जा सकता है। हालांकि, घटता भंडार बाजार के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
भंडार का सुरक्षा कवच कमजोर होने पर मौसम की मार, आपूर्ति में रुकावट या अचानक खरीदारी बढ़ने की स्थिति में बाजार अधिक संवेदनशील हो सकता है।
अल नीनो से जुड़े जोखिमों का असर चावल बाजार में दिखाई देने लगा है। कई प्रमुख चावल निर्यातक देशों में मौसम संबंधी अनिश्चितताओं और मांग-आपूर्ति के बीच कम अंतर को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसका असर कीमतों पर पड़ सकता है।
समस्या सिर्फ अल नीनो तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण उर्वरक, ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इससे खेतों से वैश्विक बाजार तक चावल पहुंचाने का खर्च भी बढ़ेगा।
भारत दुनिया के प्रमुख चावल उत्पादकों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं में शामिल है। इसलिए वैश्विक उत्पादन, व्यापार प्रवाह या कीमतों में बड़े बदलाव का असर किसानों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं—सभी पर पड़ सकता है।
फिलहाल वैश्विक भंडार बाजार के लिए सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। लेकिन अगर अल नीनो का प्रभाव अनुमान से अधिक गंभीर रहा, तो यह सुरक्षा कवच तेजी से कमजोर हो सकता है। ऐसे में 2027 में दुनिया के चावल बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है।