US-India talk  
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व्यापार वार्ता के लिए भारत आएगा अमेरिकी दल

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आएंगे

नयी दिल्ली : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी दल अगले महीने भारत आ सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका के मुख्य वार्ताकार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ आएंगे तो गोयल ने कहा, ‘ वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके अगले महीने आने की योजना है।’ रुबियो 23 मई से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आएंगे जिसका उद्देश्य व्यापार, रक्षा एवं ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी।

क्या है स्थिति : भारत और अमेरिका ने सात फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था। हालांकि, अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले ने सभी जवाबी शुल्कों को निरस्त कर दिया जिसे अमेरिकी प्रशासन साझेदार देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए एक साधन के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। इसके बाद अमेरिका ने इस वर्ष 24 फरवरी से 150 दिन के लिए व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। साथ ही, उसने धारा 301 के तहत प्रमुख निर्यातकों के खिलाफ उनकी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता एवं श्रम मानकों को लेकर दो जांच भी शुरू कीं। धारा 122 के तहत अधिकतम 150 दिन के लिए 15 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं धारा 301 के तहत जांच में यदि यह पाया जाता है कि व्यापारिक साझेदारों के कदम अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शुल्क पर कोई सीमा नहीं होती। भारत ने दोनों जांच पर अपना जवाब दे दिया है और दोनों पक्षों के बीच परामर्श जारी है।

भारत में निवेश की घोषणा : गोयल कहा कि कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने भारत में निवेश की घोषणा की है क्योंकि देश, दुनिया के लिए एक पसंदीदा निवेश गंतव्य बना हुआ है। पिछले छह महीनों में अगर मैं अमेरिकी उद्योग से मिली विभिन्न निवेश प्रतिबद्धताओं को देखूं, तो यह आंकड़ा संभवतः 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होगा। अमेजन के डेटा केंद्र निवेश और गूगल के डेटा केंद्र निवेश को देखें। मेरी समझ यह है कि अमेरिका और भारत स्वाभाविक साझेदार की तरह काम कर रहे हैं। हम एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत को प्रौद्योगिकी, नवाचार, उच्च-सटीक रक्षा, डिजिटल डेटा केंद्र, क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करना चाहिए। मौजूदा स्थिति भारत और अमेरिका के लिए साथ मिलकर काम करने और अधिक विश्वसनीय तथा मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने का उपयुक्त अवसर है।

MSME का भुगतान : सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के तरीकों पर उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में कार्यरत अमेरिकी कंपनियां वस्तुओं की स्वीकृति के सात दिन के भीतर इन इकाइयों को भुगतान करने पर विचार करें, जिससे नकदी प्रवाह तेज होगा। इससे एमएसएमई अपने व्यवसाय पर ध्यान दे सकेंगे और समय से पहले भुगतान के बदले छूट भी दे सकते हैं जिससे उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

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