नई दिल्ली : देशभर के व्यापारी और कारोबारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का ऐलान किया है। वे 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर के विरोध में यूपीआई स्कैनर, क्यूआर कोड और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढकेंगे।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रविंद्र मंगावे ने कहा कि महाराष्ट्र के साथ अन्य राज्यों के व्यापारी संगठन भी इस विरोध में शामिल होंगे। एफआरटीडब्ल्यूए, एआईसीपीडीएफ, एआईएमआरए, एआईजेएफएफ और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ समेत कई संगठनों ने समर्थन दिया है।
2,000 रुपये से अधिक के P2M यूपीआई लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर प्रस्तावित है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, छोटे कारोबारियों के P2PM लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा। अगस्त में यूपीआई पर 15.51 अरब P2M लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 8.95 लाख करोड़ रुपये थी। इसमें करीब 67 प्रतिशत राशि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन की थी।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि कम मार्जिन पर काम करने वाले खुदरा कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान की अतिरिक्त लागत डालना उचित नहीं है। एआईईओटीएफ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि मांग नहीं मानी गई तो आगे आंदोलन तेज करने की रणनीति तय की जाएगी।
इधर, पेट्रोलियम डीलरों और शेयर बाजार से जुड़े संगठनों ने भी बड़े यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर को लेकर आपत्ति जताई है। सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन पर एमडीआर को लेकर ब्रोकरों की चिंताओं पर विचार किया जाएगा।