नई दिल्ली : भारत में वाणिज्यिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। सूत्रों के अनुसार, स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो-यूटेलसैट जैसी कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों पर जल्द अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों ने बताया कि डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (डीसीसी) ने दो सितंबर को हुई बैठक में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन संबंधी सिफारिशों को मंजूरी दे दी। इसके बाद सरकार के लिए भारत में ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही सैटेलाइट संचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटित करने का रास्ता खुल सकता है।
ट्राई ने पिछले साल कुछ सैटेलाइट आधारित वाणिज्यिक संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की शर्तों और नियमों पर अपनी सिफारिशें दूरसंचार विभाग को दी थीं। इसके बाद दिसंबर 2025 में विभाग की ओर से भेजे गए संदर्भ पर नियामक ने अपना जवाब दिया था।
सरकार के पैनल द्वारा मंजूर ढांचे के तहत सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को पांच साल के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाने की उम्मीद है। इसके लिए कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का पांच प्रतिशत स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) देना होगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सैटेलाइट कनेक्टिविटी पहुंचाने वाली कंपनियों को कम एसयूसी देने का प्रावधान भी किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में सेवाओं को बढ़ावा देना है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड बुनियादी ढांचा सीमित है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक और भारतीय सैटेलाइट कंपनियां देश के उभरते सैटकॉम बाजार में प्रवेश की तैयारी तेज कर रही हैं। भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब वाणिज्यिक सेवाएं शुरू करने के लिए सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रही है, जबकि स्टारलिंक और जियो भी भारत में अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।
स्पेक्ट्रम आवंटन का यह ढांचा देश में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने से पहले एक अहम नियामकीय कदम माना जा रहा है।