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कच्चे तेल की चाल तय करेगी बाजार की दिशा

बाजार काफी हद तक खबरों पर आधारित और उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है

Dhriendra Pandey

नयी दिल्ली : इस सप्ताह पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी। शुक्रवार को ‘महाराष्ट्र दिवस’ के कारण शेयर बाजार बंद रहेंगे। बाजार काफी हद तक खबरों पर आधारित और उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों के रुझान और वैश्विक संकेतकों पर रहेगी। यदि तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट आती है तो इससे आर्थिक चिंताओं में कमी आ सकती है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने या लंबे समय तक व्यवधान रहने से बाजार में फिर से अस्थिरता और मुनाफावसूली देखी जा सकती है।चौथी तिमाही के नतीजे भी शेयर-विशिष्ट गतिविधियों के लिए प्रमुख कारक होंगे, जहां निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन, भविष्य के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के परिदृश्य पर नजर रखेंगे।

क्या है स्थिति : होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और अमेरिका-ईरान वार्ता में गतिरोध से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।

अहम आर्थिक कारक : भारत के लिए ऊंची तेल कीमतें सबसे अहम आर्थिक कारक हैं, क्योंकि इससे महंगाई, रुपये और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है।

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