हरियाणा के राज्यपाल ने रिक्रूटमेंट मंत्रा के संस्थापक अर्घ्य सरकार को 'गौरव श्री सम्मान' से किया सम्मानित 
बिजनेस

'कौशल आधारित भर्ती बनती जा रही है अब नया मानक'

डिग्री से आगे बढ़कर कौशल, संचार क्षमता और डिजिटल साक्षरता पर जोर; कंपनियां एआई आधारित एटीएस और स्किल-बेस्ड हायरिंग के जरिए युवाओं को नए अवसरों से जोड़ रहीं

हरियाणा : हरियाणा के राज्यपाल डॉ. आशीम कुमार घोष ने रिक्रूटमेंट मंत्रा के संस्थापक अर्घ्य सरकार को भर्ती और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 'गौरव श्री सम्मान' से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें विभिन्न उद्योगों में युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाने के लिए प्रदान किया गया।

सम्मान मिलने के बाद अर्घ्य सरकार ने इसे नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं, भर्ती विशेषज्ञों, नियोक्ताओं और अपने पूरे सहयोगी नेटवर्क को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार केवल अब तक के कार्यों की पहचान हैं, जबकि असली उपलब्धि ऐसे अवसर तैयार करना है जो लोगों का जीवन बदल सकें। उनके मुताबिक, यह सम्मान उन्हें रोजगार के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने के अपने मिशन को और आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

रोजगार की बड़ी संभावनाएं

अर्घ्य सरकार ने कहा कि यदि औद्योगिक विकास और निवेश की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो पश्चिम बंगाल आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत का प्रमुख रोजगार केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में वर्ष 2026-27 के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

उन्होंने यह भी कहा कि सॉल्ट लेक सेक्टर-5 और न्यू टाउन तकनीक व स्टार्टअप हब के रूप में तेजी से मजबूत हो रहे हैं। वहीं हावड़ा, दुर्गापुर, हल्दिया, सिलीगुड़ी, खड़गपुर और डंकुनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकता है।

भर्ती प्रक्रिया में बढ़ी एआई की भूमिका

अर्घ्य सरकार ने कहा कि आज अधिकांश कंपनियों में उम्मीदवारों का पहला मूल्यांकन इंसान नहीं, बल्कि एआई आधारित एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS) करता है। कई बार उम्मीदवार यह समझते हैं कि उनका आवेदन भर्ती अधिकारी ने खारिज किया, जबकि उनका रिज्यूमे एटीएस स्तर पर ही छंट जाता है।

उन्होंने नौकरी तलाशने वालों को सलाह दी कि वे जॉब डिस्क्रिप्शन को ध्यान से पढ़ें, उससे जुड़े जरूरी कीवर्ड अपने रिज्यूमे में स्वाभाविक रूप से शामिल करें और आकर्षक डिजाइन की बजाय ATS-फ्रेंडली फॉर्मेट अपनाएं। उनका कहना था कि एक पेशेवर और एटीएस-अनुकूल रिज्यूमे इंटरव्यू मिलने की संभावना को काफी बढ़ा देता है।

डिग्री नहीं, कौशल बन रहा है नई पहचान

अर्घ्य सरकार के मुताबिक, कंपनियां अब सिर्फ शैक्षणिक डिग्री के आधार पर भर्ती नहीं कर रहीं। कौशल, संचार क्षमता, व्यवहारिक दक्षता, बदलते माहौल के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता, डिजिटल साक्षरता और एआई टूल्स के उपयोग जैसी योग्यताओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्किल-बेस्ड हायरिंग अब भर्ती का नया मानक बनती जा रही है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा, "हमारी सफलता का आकलन पुरस्कारों से नहीं, बल्कि उन करियरों से होगा जिन्हें हम बनाने में मदद करते हैं।"

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