नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया में संकट के बीच आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित करने एवं उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर तीन महीने यानी 30 जून तक सीमा शुल्क से छूट देने की घोषणा की। इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, वस्त्र, दवा, रसायन, मोटर वाहन घटक तथा अन्य विनिर्माण क्षेत्रों जैसे पेट्रोरसायन कच्चा माल और मध्यवर्ती वस्तुओं पर निर्भर उद्योगों को लाभ मिलेगा। इस कदम से सरकारी खजाने पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधान को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का फैसला किया है। यह कदम एक अस्थायी एवं लक्षित राहत उपाय के रूप में उठाया गया है, ताकि घरेलू उद्योग के लिए आवश्यक पेट्रोरसायन कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहे और प्रसंस्करण क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम हो तथा देश में आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।
किन्हें मिली है छूट : मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टॉलुइन, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमिथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉली ब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन को सीमा शुल्क छूट दी गई है।
क्या है स्थिति : पश्चिम एशिया युद्ध के कारण शिपिंग मार्गों में व्यवधान से उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत उर्वरक एवं पेट्रोलियम का बड़ा आयातक है। अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले शुरू करने और तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले सप्ताह वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटा दिया था। साथ ही डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है। फिलहाल पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क तीन रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य है।