नई दिल्ली : भारत के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को घरेलू और वैश्विक बाजार में बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अगले 10 वर्षों में करीब 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की जरूरत होगी। वर्तमान में यह क्षेत्र करीब 4.6 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और वर्ष 2030 तक रोजगार बढ़कर लगभग 6 करोड़ होने का अनुमान है।
अपैरल, मेड-अप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (एएमएचएसएससी) की कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने क्षेत्र की भविष्य की कौशल जरूरतों पर चर्चा की। उद्योग के अनुमान के अनुसार, भारत का अपैरल बाजार 2030 तक 130-150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और इस दौरान 10-12 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर रहने की संभावना है। कार्यशाला का उद्घाटन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेनसरमा ने किया। इसमें एएमएचएसएससी के चेयरमैन प्रेमल उदानी, सीईओ आशीष श्रीवास्तव और नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के चेयरमैन ललित ठुकराल समेत उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मनीषा सेनसरमा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है। उन्होंने पाठ्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने, आईटीआई को उन्नत करने और एआई व उभरती तकनीकों में लगातार अपस्किलिंग पर जोर दिया।
भारत का घरेलू अपैरल बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक इसके 130-150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान बाजार में 10-12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रहने की संभावना है।
एएमएचएसएससी के चेयरमैन प्रेमल उदानी ने कहा कि कृषि के बाद अपैरल उद्योग भारत में रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। नए मुक्त व्यापार समझौतों से निर्यात के अवसर बढ़ने के साथ कुशल कर्मचारियों की मांग भी बढ़ेगी।
एएमएचएसएससी के सीईओ आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। इससे भारतीय निर्माताओं को नए बाजार मिलेंगे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उनकी स्थिति मजबूत होगी।