नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा 147ए को असंवैधानिक घोषित किया गया था। न्यायमूर्ति अलोक अराधे और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर, 2026 को होगी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य मामले का अंतिम फैसला आने तक संबंधित आकलन कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने दो दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखा था।
मामला आयकर विभाग की ‘फेसलेस असेसमेंट’ व्यवस्था के तहत पुनर्मूल्यांकन नोटिस जारी करने के अधिकार से जुड़ा है। सवाल यह था कि क्या क्षेत्राधिकार वाला आकलन अधिकारी (जेएओ) आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस और धारा 148ए के तहत आदेश स्वतंत्र रूप से जारी कर सकता है, या इसके लिए राष्ट्रीय फेसलेस असेसमेंट केंद्र (एनएफएसी) की निर्धारित प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
इस मुद्दे पर अलग-अलग हाईकोर्टों के फैसलों में मतभेद रहा है। कुछ अदालतों ने फेसलेस प्रक्रिया का पालन किए बिना जेएओ द्वारा शुरू की गई कार्यवाही को अमान्य माना था।
संसद ने धारा 147ए को 1 अप्रैल, 2021 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू किया था। इसके जरिए धारा 148 और 148ए में ‘आकलन अधिकारी’ के संदर्भ को एनएफएसी के अलावा अन्य अधिकारी के रूप में स्पष्ट करने की कोशिश की गई थी।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने माना था कि इस संशोधन से पूर्वव्यापी रूप से उन पुनर्मूल्यांकन कार्यवाहियों को वैध ठहराने की कोशिश हुई, जिन्हें अदालतें निर्धारित फेसलेस प्रक्रिया का पालन नहीं करने के कारण दोषपूर्ण मान चुकी थीं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने धारा 147ए को असंवैधानिक घोषित किया था।
सुप्रीम कोर्ट की रोक अंतरिम है। धारा 147ए की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।