2047 तक 600 मिलियन टन से ज्यादा होगी इस्पात क्षमता 
बिजनेस

2047 तक 600 मिलियन टन से ज्यादा होगी इस्पात क्षमता

Goutam Ojha

नई दिल्ली : सरकार नई राष्ट्रीय इस्पात नीति का मसौदा करीब एक सप्ताह में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करेगी। इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित नीति में 2047 तक भारतीय इस्पात उद्योग के विकास का खाका तय किया जाएगा। इसके तहत देश की इस्पात उत्पादन क्षमता 600 मिलियन टन से अधिक और खपत 500 मिलियन टन से ज्यादा पहुंचाने का लक्ष्य रखा जाएगा। करीब 45 मिलियन टन इस्पात का निर्यात सीधे या तैयार उत्पादों में शामिल इस्पात के रूप में होने का अनुमान है।

सीआईआई के ‘मैन्युफैक्चरिंग कॉन्फ्लुएंस 2026’ से इतर पौंड्रिक ने कहा कि नई नीति 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति की जगह लेगी, जिसकी समयसीमा 2030 तक थी। नई नीति में कृत्रिम मेधा, मशीन लर्निंग, तकनीकी उन्नयन, डीकार्बोनाइजेशन और टिकाऊ उत्पादन जैसी नई चुनौतियों को शामिल किया गया है।

आयात के मोर्चे पर सस्ते और घटिया इस्पात को हतोत्साहित करने के लिए सुरक्षा शुल्क और डंपिंग रोधी शुल्क जैसे उपायों का प्रावधान होगा। हालांकि, पौंड्रिक ने कहा कि फिलहाल मौजूदा तीन साल की सुरक्षा शुल्क व्यवस्था काम कर रही है और तत्काल इसमें बढ़ोतरी पर विचार नहीं हो रहा है।

छोटे उत्पादकों के लिए सरकार 5,000 करोड़ रुपये की ‘विकसित भारत इस्पात’ योजना प्रस्तावित कर रही है। इसके तहत उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन में कमी के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। बड़े उत्पादकों के लिए कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) को जल्द अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है। सरकार ने कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण मिशन को भी मंजूरी दी है।

पौंड्रिक के अनुसार, 175 विशेष इस्पात परियोजनाओं में 55,000 करोड़ रुपये का निवेश चल रहा है। 2047 तक क्षमता विस्तार के लिए 700 मिलियन टन से अधिक लौह अयस्क की जरूरत होगी, जबकि घरेलू प्रौद्योगिकी और कच्चे माल की उपलब्धता बड़ी चुनौती होगी। इस्पात क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सरकार ने दुर्घटनाओं की जांच और सुरक्षा मानकों की निगरानी हेतु ‘स्टील इंडस्ट्री सेफ्टी काउंसिल’ भी गठित की है।

SCROLL FOR NEXT