बिजनेस

बजट 2026-27 को लेकर स्टार्टअप सेक्टर आशान्वित

सरकार से टैक्स सुधार और निवेश समर्थन की अपेक्षा है स्टार्टअप सेक्टर को।

इंद्राणी

नई दिल्लीः केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले देश का स्टार्टअप सेक्टर सरकार की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। स्टार्टअप संगठनों और उद्यमियों ने बजट को लेकर अपनी प्रमुख मांगें सामने रखी हैं, जिनमें टैक्स में राहत, फंडिंग की बेहतर व्यवस्था और अपने उत्पादों व सेवाओं के लिए बाज़ार तक आसान पहुंच शामिल है। उद्यमियों का मानना है कि अनुकूल नीतियां अपनाए जाने से नवाचार को गति मिलेगी और देश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बीते कुछ वर्षों में भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से उभरते स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित हुआ है। हालांकि, हाल के समय में फंडिंग की सुस्ती, परिचालन लागत में वृद्धि और जटिल नियमों के चलते स्टार्टअप इकोसिस्टम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में आगामी बजट से सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद है।

स्टार्टअप्स की सबसे अहम मांग टैक्स से जुड़ी है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एंजेल टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने, स्टार्टअप्स के लिए कॉरपोरेट टैक्स में रियायत देने और ईएसओपी (ESOP) पर टैक्स नियमों को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स पर वित्तीय दबाव कम होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

इसके अलावा, शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए सस्ते कर्ज, सरकारी गारंटी वाले फंड और ‘फंड ऑफ फंड्स’ योजना को और मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है। स्टार्टअप संस्थापकों का मानना है कि इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और छोटे शहरों तक उद्यमिता का विस्तार होगा।

डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिए टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी और हेल्थटेक स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की भी मांग की जा रही है। कुल मिलाकर, स्टार्टअप सेक्टर चाहता है कि बजट 2026-27 में नीतिगत स्थिरता, वित्तीय समर्थन और सरल नियमों के जरिए भारत को वैश्विक स्टार्टअप लीडर बनाने की दिशा में ठोस और दूरगामी कदम उठाए जाएं।

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