मुंबई : पूंजी बाजार नियामक सेबी ने शेयर बाजार के माध्यम से खुले बाजार में शेयरों की पुनर्खरीद को एक अगस्त से दोबारा शुरू करने का फैसला किया। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बैठक में यह तय किया गया कि पुनर्खरीद की प्रक्रिया निर्गम खुलने की तारीख से 66 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही, निर्धारित राशि का कम-से-कम 40 प्रतिशत हिस्सा पुनर्खरीद अवधि के पहले आधे हिस्से में उपयोग करना अनिवार्य होगा। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि कंपनियों को अब अलग से पुनर्खरीद खिड़की बनाए बगैर नियमित खरीद-बिक्री व्यवस्था के जरिए सीधे शेयरों की पुनर्खरीद करने की अनुमति होगी। कराधान ढांचे में बदलाव को ध्यान में रखते हुए खुले बाजार में पुनर्खरीद की व्यवस्था को दोबारा लागू किया जा रहा है ताकि कंपनियों को पुनर्खरीद के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल सके।
प्रवर्तक या उनके सहयोगियों के शेयरों के लेन-देन पर रोक रहेगी : इससे पहले, शेयर बाजार के जरिए खुले बाजार में पुनर्खरीद की व्यवस्था को एक अप्रैल 2025 से बंद कर दिया गया था। उस समय शेयरधारकों के साथ समान व्यवहार और कर संबंधी प्रभावों को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। बाजार नियामक ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्खरीद अवधि के दौरान प्रवर्तक या उनके सहयोगियों के शेयरों के लेन-देन पर रोक रहेगी। इसके साथ, कंपनियां न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानकों का उल्लंघन करते हुए पुनर्खरीद की घोषणा नहीं कर सकेंगी। अब पुनर्खरीद के लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति अनिवार्य नहीं होगी। इसके साथ दो पुनर्खरीद प्रस्तावों के बीच न्यूनतम अंतराल को कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप करने का फैसला भी किया गया है।
मृत्यु के बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाया : सेबी ने निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उपायों को मंजूरी दे दी। इससे नामित व्यक्तियों और कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों पर दावा करना अधिक आसान और त्वरित हो जाएगा। नई व्यवस्था के तहत क्यूटीपी सुविधा भौतिक रूप में रखी गई प्रतिभूतियों के लिए 10,000 रुपये तक तथा डीमैट प्रतिभूतियों के लिए 30,000 रुपये तक के दावों पर उपलब्ध होगी। सरलीकृत दस्तावेजी प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की सीमा भी दोगुनी कर दी गई है। भौतिक प्रतिभूतियों के मामले में प्रति सूचीबद्ध कंपनी सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि डीमैट प्रतिभूतियों के लिए प्रति लाभार्थी सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है।
म्यूचुअल फंड के लिए कर्ज लेने के नियमों में ढील : सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए नकदी प्रंबंधन को लेकर कारोबार के दौरान कर्ज लेने के नियमों में आसान बनाया है। इसके तहत नियामक ने शुक्रवार को म्यूचुअल फंड कंपनियों को कारोबार के दौरान लिए जाने वाले अल्पकालिक ऋण का उपयोग केवल निवेशकों को धन लौटाने तक सीमित रखने के बजाय व्यापार निपटान, विदेशी मुद्रा दायित्वों और डेरिवेटिव मार्जिन भुगतान सहित व्यापक नकदी प्रबंधन जरूरतों के लिए करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस कदम का उद्देश्य उन परिचालन संबंधी चुनौतियों को दूर करना है, जिनका सामना परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को विभिन्न योजनाओं में नकदी के बाहर जाने और आने के बीच समय अंतर के कारण करना पड़ता है।