मुंबई : टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच जारी विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा का परोक्ष रूप से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह की सामाजिक प्रतिबद्धता और संस्थागत भूमिका को बनाए रखना जरूरी है। पवार ने कहा कि नेतृत्व से जुड़े मौजूदा विवाद को उचित प्रक्रिया, बातचीत और कंपनी की नियमावली के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि टाटा समूह की ट्रस्ट-आधारित विरासत की रक्षा करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि समूह का परोपकारी स्वामित्व ढांचा भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है और इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
पवार ने कहा कि टाटा समूह की विरासत इस विचार पर आधारित है कि कारोबार को समाज की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था के तहत टाटा ट्रस्ट की संस्थागत भूमिका और अधिकारों का सम्मान करने की आवश्यकता जताई।
17 सितंबर को टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में फिर नियुक्त करने के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, समूह में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने कुछ ही घंटों बाद इस मतदान को अमान्य घोषित कर दिया। चार निदेशकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया।
इसके अलावा, टाटा संस के निदेशक मंडल ने शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। नोएल टाटा ने टाटा संस की सार्वजनिक सूचीबद्धता का कड़ा विरोध किया है, ताकि समूह के पारंपरिक परमार्थ और परोपकारी स्वरूप को सुरक्षित रखा जा सके।उन्होंने कहा कि टाटा समूह की मूल संरचना उसकी नियमावली और ट्रस्ट-आधारित स्वामित्व व्यवस्था में निहित है। पवार ने कहा कि जमशेदजी टाटा की उस दूरदृष्टि को आगे बढ़ाना जरूरी है, जिसे सर दोराबजी टाटा और सर रतन टाटा ने आगे बढ़ाया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि उद्यम से अर्जित संपत्ति समाज को वापस मिले और कोई एक व्यक्ति पूरे समूह का मालिक न बने।
पवार ने कहा कि टाटा ट्रस्ट द्वारा स्थापित टाटा मेमोरियल अस्पताल, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) और नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) जैसे प्रमुख संस्थान ट्रस्ट की स्थिरता और प्रबंधन पर काफी हद तक निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को कमजोर करने से उन प्रतिष्ठित संस्थानों पर भी असर पड़ेगा, जिन पर देश और महाराष्ट्र की जनता निर्भर है। पवार के अनुसार, एक सदी से अधिक समय से टाटा ट्रस्ट ने अल्पकालिक मुनाफे के बजाय मूल्यों और साख को प्राथमिकता दी है और इसी वजह से टाटा नाम पर जनता का भरोसा कायम है।
पवार ने कहा कि टाटा समूह महाराष्ट्र की जड़ों से जुड़ा राष्ट्रीय संस्थान है और उसके परोपकारी स्वामित्व की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चेयरमैन के चयन सहित महत्वपूर्ण फैसलों में ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों की सहमति से जुड़े नियमों का सम्मान होना चाहिए तथा नेतृत्व से जुड़े विवाद बातचीत और उचित प्रक्रिया के जरिये सुलझाए जाने चाहिए।