नई दिल्ली : डेरिवेटिव कारोबार में एक्सपायरी के दिन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) अपने हाल में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में बड़ा बदलाव कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, नियामक कम से कम एक साल तक डेरिवेटिव अनुबंधों के सेटलमेंट मूल्य तय करने के लिए CAS का इस्तेमाल रोककर कारोबार के अंतिम 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) को आधार बना सकता है। यह बदलाव अक्टूबर के अंत तक लागू किए जाने की संभावना है।
सेबी ने अगस्त में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) वाले शेयरों के लिए CAS व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत कारोबारी सत्र के अंत में होने वाली छोटी अवधि की नीलामी से शेयर का क्लोजिंग मूल्य तय किया जाता है। हालांकि, इस व्यवस्था के बाद खासकर एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसके बाद नियामक ने इसकी समीक्षा शुरू की।
संभावित बदलाव के तहत कम कारोबार वाले नकदी बाजार के शेयरों में दिन का अंतिम मूल्य तय करने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन जारी रह सकता है। यानी डेरिवेटिव सेटलमेंट और कैश मार्केट के क्लोजिंग प्राइस के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी।
सेबी के परामर्श पत्र पर बाजार प्रतिभागियों से करीब 20,000 सुझाव मिले हैं। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि नियामक CAS से जुड़े प्रस्तावों पर व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर फैसला करेगा। सात प्रस्तावों पर कुल करीब 1.35 लाख टिप्पणियां मिली हैं।
इंडेक्स की CAS अवधि में संकेतक मूल्य प्रकाशित करने के प्रस्ताव पर भी बाजार से व्यापक प्रतिक्रिया मिली है। अधिकांश प्रतिक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही गई। नियमित शेयर कारोबार का समय 3:30 बजे और डेरिवेटिव कारोबार 3:45 बजे तक बनाए रखने के पक्ष में भी राय सामने आई है।