मुंबई : बाजार नियामक सेबी ने पायलट प्रोजेक्ट ‘डीमैट 2.0’ शुरू किया है। यह फिलहाल कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए शुरू किया गया है, जिसमें पैसा जाते ही बॉन्ड अकाउंट में आ जाएंगे। बाद में इसे शेयरों के भी तत्काल सेटलमेंट के लिए लागू किया जाएगा। ‘डीमैट 2.0’ आरबीआई की थोक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) से जुड़ा है। इसके लिए रिजर्व बैंक के एकीकृत बाजार इंटरफेस (यूएमआई) का इस्तेमाल किया गया है।
पुराने डीमैट अभी ज्यों के त्यों चलेंगे, इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे शेयरों पर भी लागू करने की तैयारी है। वर्तमान डीमैट को उसी हिसाब से अपग्रेड कर दिया जाएगा, लेकिन उसमें अभी समय लगेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा और सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की। मल्होत्रा ने इस मौके पर ग्राहकों के लिए दो नई एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) सुविधाओं की भी घोषणा की। इनमें बिक्री केंद्रों पर लगी मशीन (पीओएस) पर ‘यूपीआई टैप एंड पे’ और राष्ट्रीय भुगतान निगम की लघु भाषा मॉडल (एफआईएमआई) आधारित ग्राहक सहायता सुविधा ‘माईयूपीआई’ शामिल हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि ‘डीमैट 2.0’ नई बाजार अवसंरचना है। इसे कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, रखने, कारोबार करने और उनके निपटान के नए तरीके का परीक्षण करने के लिए विकसित किया गया है। इस व्यवस्था में बॉन्ड को वितरित बही-खाते (लेजर) तकनीक पर एक डिजिटल टोकन के रूप में बनाया जाता है। यह एक साझा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख होता है, जिसे वितरित बही-खाते तकनीक के जरिये बाजार से जुड़ी बुनियादी संस्थाएं एक साथ बनाए रखती हैं। बॉन्ड से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को बनाए रखने का अधिकार डिपॉजिटरी के पास होता है। टोकन व्यवस्था के तहत जारी कॉरपोरेट बॉन्ड पारंपरिक कंपनी ऋण प्रतिभूतियां हैं जिनके स्वामित्व और निपटान रिकॉर्ड को पुराने, बहु-चरणीय बाजार अवसंरचना के बजाय एक वितरित बही-खाता या ब्लॉकचेन पर डिजिटल रूप से प्रबंधित किया जाता है।
सेबी ने बयान में कहा, ‘डीमैट 2.0’ तत्काल और एक साथ निपटान की सुविधा देता है, यानी बॉन्ड और धनराशि एक ही समय में हस्तांतरित हो जाती है।’ इस प्रौद्योगिकी से प्रतिभूति बाजार में लेनदेन की दक्षता बढ़ती है। ब्याज भुगतान और बॉन्ड की राशि की वापसी जैसी सेवाओं को स्वचालित किया जा सकता है। इसके लिए स्मार्ट अनुबंधों का इस्तेमाल होता है, जो बही-खाते में दर्ज ऐसे निर्देश हैं जो अपने आप लागू हो जाते हैं। साझा बही-खाते या डिजिटल फाइल में बॉन्डधारक की जानकारी सभी अधिकृत संस्थाओं को एक साथ दिखाई देती है और देय तिथि पर भुगतान सीधे बॉन्डधारकों के केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा वाले खातों में पहुंच जाता है। सेबी ने कहा, ‘‘इन सुविधाओं से कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करने, उनके निपटान और उनसे जुड़ी सेवाओं की प्रक्रिया तेज और अधिक दक्ष होने की उम्मीद है।’’
बाजार नियामक के अनुसार, दुनिया के कई देशों में टोकन व्यवस्था से जुड़े प्रयोग और व्यावसायिक स्तर पर इसकी शुरुआत हो चुकी है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर टोकन व्यवस्था मुख्य रूप से अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग जारीकर्ताओं द्वारा की गयी है। सेबी ने कहा कि भारत पहला देश है जहां कॉरपोरेट बॉन्ड को मूल रूप से वितरित बही-खाते तकनीक पर जारी किया गया है। इसमें स्वामित्व का रिकॉर्ड देश की डिपॉजिटरी के पास रहता है और धनराशि का अंतिम निपटान केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा में मौजूदा विनियमित बाजार ढांचे के भीतर होता है। अब तक तीन कंपनियों...आरईसी, एलएंडटी और आईआईएफएल...ने टोकन व्यवस्था के तहत कुल 1,025 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए हैं।
‘यूपीआई टैप एंड पे’ सुविधा के तहत उपयोगकर्ता अपने निकट क्षेत्र संचार (एनएफसी) सुविधा वाले स्मार्टफोन के जरिये एनएफसी-सक्षम बिक्री केंद्र मशीन पर स्पर्श करके तेजी से भुगतान कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए उपयोगकर्ता को मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। लेनदेन बिक्री केंद्र मशीन के इंटरनेट संपर्क के जरिये पूरा किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य रोजमर्रा के भुगतान को तेज और आसान बनाना है। एनएफसी एक अल्प दूरी की वायरलेस तकनीक है जो स्मार्टफोन को अन्य उपकरणों के साथ डेटा साझा करने की अनुमति देती है जब उन्हें एक दूसरे से कुछ सेंटिमीटर की दूरी के भीतर रखा जाता है। वहीं, राष्ट्रीय भुगतान निगम के लघु भाषा मॉडल ‘फिमी’ पर आधारित कृत्रिम मेधा प्रणाली ‘माईयूपीआई’ यूपीआई सहायता सेवा में कई नई सुविधाएं जोड़ेगी। इसका उद्देश्य यूपीआई व्यवस्था में भरोसा, सुरक्षा और ग्राहकों की सुविधा बढ़ाना है। इस मौके पर राष्ट्रीय भुगतान निगम के गैर-कार्यकारी चेयरमैन एवं स्वतंत्र निदेशक अजय कुमार चौधरी के साथ वरिष्ठ बैंक अधिकारी, फिनटेक कंपनियों के संस्थापक और बैंकिंग तथा फिनटेक क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग भी मौजूद थे। राष्ट्रीय भुगतान निगम भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए जिम्मेदार शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ ने की है।