मुंबई : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बृहस्पतिवार अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरकर 41 पैसे चढ़कर 91.64 पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप की खबरों के कारण भारतीय मुद्रा में यह उछाल आया। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितताओं और अत्यधिक उतार-चढ़ाव से स्थानीय मुद्रा को बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने हस्तक्षेप किया। हालांकि, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी निकासी ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। बुधवार को रुपया 56 पैसे टूटकर 92.05 प्रति डॉलर के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। इससे पहले सोमवार को भी इसमें 41 पैसे की गिरावट दर्ज की गई थी।
क्या कहते हैं विश्लेषक : डीबीएस बैंक इंडिया के कार्यकारी निदेशक और व्यापार प्रमुख, समीर करयाट ने कहा , पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय रुपये पर काफी असर डाला है। कच्चे तेल की आपूर्ति और तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर चिंताओं ने रुपये की विनिमय दर पर दबाव डाला है। मौजूदा अनिश्चित माहौल में सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों की ओर झुकाव होने से रुपये पर यह दबाव और बढ़ गया है, जिससे इस हफ्ते विनिमय दर में लगभग 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।
डॉलर सूचकांक : दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.31 प्रतिशत बढ़कर 99.07 पर रहा।
ब्रेंट क्रूड वायदा : वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 2.84 प्रतिशत बढ़कर 83.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत के आयात बिल में तेज बढ़ोतरी का खतरा है, क्योंकि देश की लगभग 85 प्रतिशत ईंधन जरूरतें आयात से पूरी होती हैं।