मुंबई : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जबर्दस्त तेजी तथा विदेशी पूंजी की भारी निकासी की वजह से अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में बृहस्पतिवार को रुपया 24 पैसे लुढ़ककर 92.25 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली और डॉलर के मजबूत होने से भारतीय मुद्रा पर असर पड़ा।
क्या रही स्थिति : अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 92.25 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें लगातार गिरावट जारी रही और यह डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 92.36 को छू गया। कारोबार के अंत में यह 92.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 24 पैसे की गिरावट है। रुपया इससे पहले नौ मार्च को कारोबार के दौरान 92.35 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक टूटा था। उस दिन रुपया अपने 92.21 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।
क्या रहा कारण : मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, कमजोर घरेलू बाजारों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया 92.36 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर सूचकांक में सकारात्मक वृद्धि और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निकासी ने भी रुपये पर दबाव डाला। हालांकि, केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के बाद रुपये में कुछ सुधार हुआ। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण रुपये में लगातार 13वें दिन नकारात्मक रुझान रहने के आसार हैं। विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी से रुपये पर और दबाव पड़ सकता है। चौधरी ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 91.70 से 92.40 के बीच रह सकता है।
डॉलर सूचकांक : इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.38 पर रहा।