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रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर

इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा में 1.50 प्रतिशत की गिरावट आई है

मुंबई : वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता एवं जोखिम से बचने की धारणा के बीच विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी से घरेलू मुद्रा पर दबाव रहा। इससे रुपया बुधवार को 68 पैसे लुढ़ककर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 91.65 पर बंद हुआ। रुपया 16 दिसंबर 2025 को 91.14 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस महीने अब तक स्थानीय मुद्रा में 1.50 प्रतिशत की गिरावट आई है।

गिरावट का कारण : इस गिरावट का कारण भू-राजनीतिक अनिश्चितता में वृद्धि है। ग्रीनलैंड मुद्दे और संभावित शुल्क को लेकर यूरोप के साथ बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया है। घरेलू बाजार में नकारात्मक रुझान ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।

क्या रही स्थिति : अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.05 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान लुढ़कर 91.74 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया। अंत में 91.65 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 68 पैसे की गिरावट है। रुपया मंगलवार को सात पैसे की गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 90.97 पर बंद हुआ था। कोटक महिंद्रा एएमसी के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) अभिषेक बिसेन ने कहा, भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं। भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक कारोबार पर असर डाल रहे हैं। वैश्विक तनाव में ग्रीनलैंड विवाद और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण शामिल है।

नाटो के टूटने का खतरा : ग्रीनलैंड विवाद ने अमेरिका-यूरोप संबंधों को खराब किया है और इससे नाटो के टूटने का खतरा है। अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता एक प्रमुख स्थिरता का कारक बना हुआ है क्योंकि इसके निष्कर्ष से विश्वास एवं द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.61 पर रहा।

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