अर्थव्यवस्था के अगले दौर में निजी निवेश को नेतृत्व करना होगा: सीतारमण 
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अर्थव्यवस्था के अगले दौर में निजी निवेश को नेतृत्व करना होगा: सीतारमण

वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की अपील

Goutam Ojha

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अर्थव्यवस्था के अगले चरण में विकास की रफ्तार बनाए रखने और वैश्विक अनिश्चितताओं से मुकाबला करने के लिए निजी निवेश को आगे आना होगा। उन्होंने निजी क्षेत्र से पूंजीगत व्यय बढ़ाने के साथ-साथ शोध एवं विकास (R&D) पर खर्च बढ़ाने की अपील की।

कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में वित्त मंत्री ने कहा कि अब आर्थिक चक्र का नेतृत्व निजी निवेश को करना चाहिए और इसमें शोध एवं नवाचार भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत का R&D खर्च फिलहाल GDP का केवल 0.83 प्रतिशत है, जबकि OECD अर्थव्यवस्थाओं में यह औसतन 2.7 प्रतिशत है। देश के कुल R&D खर्च में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी भी सिर्फ 36 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि नवाचार क्षमता मजबूत करने के लिए निवेश का स्तर और निजी क्षेत्र की भागीदारी, दोनों बढ़ाना जरूरी है।

सरकार ने FY25 के अंतरिम बजट में निजी क्षेत्र को R&D के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड की घोषणा की थी।

सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब स्थायी स्थिति बनती जा रही है। ऐसे में रणनीतिक संसाधन सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक खुलेपन और कौशल विकास पर ध्यान देना होगा। उन्होंने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि भारत की वास्तविक GDP वृद्धि FY27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार करीब 766 अरब डॉलर है। बैंकों का सकल NPA भी कई दशकों के निचले स्तर पर है।

FY27 में सरकार ने 12.22 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये यानी GDP का 4.4 प्रतिशत है। सीतारमण ने कहा कि अगली चुनौती इन क्षमताओं को अधिक उत्पादकता, बेहतर रोजगार और व्यापक आर्थिक अवसरों में बदलने की है।

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