नई दिल्ली : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए बढ़ती कंप्यूटिंग और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से गूगल अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की संभावना तलाश रहा है। कंपनी ‘प्रोजेक्ट सनकैचर’ के तहत सौर ऊर्जा से संचालित ऐसे उपग्रहों के इस्तेमाल पर काम कर रही है, जिनमें एआई चिप लगाई जाएंगी। इस दिशा में पहला कक्षीय परीक्षण अगले सप्ताह एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट भेजकर किया जाएगा।
गूगल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या भविष्य में डेटा सेंटर को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जा सकता है और उन्हें सैटेलाइट के नेटवर्क के रूप में बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है। प्रोटोटाइप को लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित किया जाएगा। इसमें गूगल की अपनी विकसित टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (टीपीयू) का इस्तेमाल होगा।
परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि एआई कंप्यूटिंग हार्डवेयर अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों में किस तरह काम करता है। इनमें प्रक्षेपण के दौरान लगने वाला दबाव, विकिरण और अत्यधिक तापमान जैसी चुनौतियां शामिल हैं। गूगल के मुताबिक, परीक्षण मुख्य रूप से यह समझने के लिए है कि क्या एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक तैनात और भविष्य में बड़े नेटवर्क में बदला जा सकता है।
हालांकि, इस परियोजना में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती चिप को ठंडा रखना है। गूगल के मुताबिक, टीपीयू बहुत कम क्षेत्र में काफी गर्मी पैदा करता है। पृथ्वी की तरह अंतरिक्ष में हवा का प्रवाह नहीं होने के कारण वैक्यूम में गर्मी को रेडिएटर के जरिए ही बाहर निकालना पड़ता है।
कंपनी इसके लिए हीट पाइप और रेडिएटर के संयोजन समेत कई तकनीकों का परीक्षण कर रही है। गूगल ने थर्मल वैक्यूम चैंबर में अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियां बनाकर कूलिंग सिस्टम का परीक्षण भी किया है। अब अंतरिक्ष में होने वाला परीक्षण इन तकनीकों की वास्तविक परिस्थितियों में क्षमता परखने में मदद करेगा। गूगल के साथ स्पेसएक्स और स्टारक्लाउड जैसी कंपनियां भी लो अर्थ ऑर्बिट में डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर काम कर रही हैं।