नई दिल्ली : भारत सरकार बिजली क्षेत्र में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना 2030 के बाद बिजली क्षेत्र में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) प्रणालियों के आयात को समाप्त करने की है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की हालिया रिपोर्ट में 2028-29 तक स्वदेशी SCADA प्रणाली विकसित करने के लिए तीन वर्ष का रोडमैप प्रस्तावित किया गया है।
SCADA प्रणालियां बिजली ग्रिड की महत्वपूर्ण नियंत्रण परत के रूप में काम करती हैं। इनके माध्यम से बिजली उत्पादन, पारेषण और सब-स्टेशनों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है तथा जरूरत पड़ने पर महत्वपूर्ण उपकरणों को दूर से नियंत्रित किया जा सकता है।
CEA के अनुसार, देश की ग्रिड-स्तरीय SCADA प्रणालियों में फिलहाल स्थानीय सामग्री की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से भी कम है, जबकि सरकार ने कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू सामग्री का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारतीय कंपनियां कई मामलों में विदेशी लाइसेंस और प्रमुख तकनीकी घटकों पर निर्भर हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर असेंबली, कॉन्फिगरेशन, रखरखाव और सहायता का काम किया जाता है।
CEA ने इस निर्भरता को साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर अपडेट, आपूर्ति श्रृंखला और विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली तकनीक तक पहुंच से जुड़े संभावित जोखिम के रूप में चिह्नित किया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति मार्गों में व्यवधान ने भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता के जोखिम को उजागर किया है।
CEA की SCADA स्वदेशीकरण समिति ने 2026-27 से 2028-29 तक चरणबद्ध विकास कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा है। इसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों का स्वदेशीकरण शामिल है।
रोडमैप के तहत बिजली ग्रिड की निगरानी और प्रबंधन के लिए 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल तथा सर्वर, वर्कस्टेशन और स्टोरेज सिस्टम सहित 25 प्रमुख हार्डवेयर घटकों के विकास का प्रस्ताव है।
पहले चरण में कोर SCADA और संचार प्रणालियों का विकास किया जाएगा। इसके बाद ग्रिड की स्थिति का आकलन, बिजली उत्पादन प्रबंधन, विद्युत प्रवाह की योजना और संभावित सुरक्षा जोखिमों की पहचान जैसी उन्नत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 2028-29 तक आउटेज की योजना बनाने और पारेषण नेटवर्क की निगरानी जैसी विशेष सुविधाओं को विकसित करने का लक्ष्य है।
CEA समिति का मानना है कि भारत इस समयसीमा में स्वदेशीकरण कार्यक्रम पूरा करने की तकनीकी क्षमता रखता है। हालांकि, इसके लिए पर्याप्त वित्तपोषण, परीक्षण ढांचे और संस्थागत सहयोग की जरूरत होगी।
कार्यक्रम को गति देने के लिए समिति ने बिजली मंत्रालय के तहत ‘राष्ट्रीय SCADA मिशन’ या एक समर्पित कार्यसमूह गठित करने का सुझाव दिया है। इसके लिए पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, ग्रिड-इंडिया और घरेलू प्रौद्योगिकी कंपनियों का संघ भी बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट में लोड डिस्पैच केंद्रों पर सरकारी सहयोग से परीक्षण और पायलट परियोजनाएं शुरू करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि स्वदेशी प्रणालियों को व्यापक इस्तेमाल से पहले वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में परखा जा सके।
बिजली नेटवर्क के तेजी से डिजिटलीकरण और आपस में जुड़ाव के कारण साइबर हमलों का जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे हमले नियंत्रण प्रणालियों के संचालन को प्रभावित करने, संवेदनशील डेटा से समझौता करने और गंभीर स्थिति में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता पर असर डालने में सक्षम हो सकते हैं।
सरकार ने बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा से जुड़े नए नियम भी अधिसूचित किए हैं, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं। SCADA के स्वदेशीकरण की योजना और नए साइबर सुरक्षा नियम मिलकर बिजली क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने तथा विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।