IPO 
बिजनेस

IPO के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है NSE

को-लोकेशन विवाद सुलझने के बाद फिर रफ्तार पकड़ी लिस्टिंग प्रक्रिया, पांच लाख करोड़ से अधिक मूल्यांकन वाला आईपीओ बन सकता है सबसे बड़े इश्यू में से एक

नयी दिल्ली : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच सकता है। सूत्रों के अनुसार, NSE 15 या 16 जून को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है। NSE के निदेशक मंडल ने छह फरवरी को प्रस्तावित को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने के बाद दी गई थी। यह पूरी तरह बिक्री पेशकश पर आधारित होगा, यानी इसमें देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की ओर से कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

NSE के शेयरधारक : NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। भारतीय जीवन बीमा निगम 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। भारतीय स्टेट बैंक और उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की अनुषगी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा के पेंशन योजना निवेश बोर्ड की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है।

क्या है मामला : NSE की सूचीबद्धता की योजना लगभग एक दशक से विभिन्न नियामकीय कारणों, विशेष रूप से ‘को-लोकेशन’ विवाद के चलते अटकी हुई थी। जनवरी में सेबी द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद प्रक्रिया को फिर से गति मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के पूंजी बाजार के सबसे बड़े में से एक हो सकता है। गैर-सूचीबद्ध (अनलिस्टेड) बाजार में NSE का मूल्यांकन पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। एक्सचेंज के लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं। NSE ने पहली बार 2016 में लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन सेबी ने कामकाज के संचालन और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण मंजूरी रोक दी थी।

SCROLL FOR NEXT