नई दिल्ली : ओपनएआई के मुख्य वैज्ञानिक याकूब पाचोकी ने कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मशीनी बुद्धिमत्ता में तेज वृद्धि के संभावित परिणामों के लिए फिलहाल ‘कोई भी तैयार नहीं है’। पाचोकी ने ‘एन एलियन माइंड’ शीर्षक से लिखे पोस्ट में कहा कि अगर एआई के विकास की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो अगले कुछ वर्षों में इसकी क्षमताओं में बड़ी छलांग आ सकती है और यह अपने विकास की गति को भी बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतने का समय है। जब तक एआई सुरक्षा के साझा मानक तय नहीं होते, तब तक इसके विकास की गति को स्वैच्छिक रूप से धीमा करना सामान्य व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहिए। साथ ही, एआई के भविष्य के विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय समन्वय को सरकारों की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया जाना चाहिए।
पाचोकी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एआई एजेंट तकनीकी विकास की नई सीमा के रूप में उभर रहे हैं। ये प्रणालियां कई चरणों वाले कार्यों की स्वतंत्र रूप से योजना बनाकर उन्हें पूरा कर सकती हैं। उनकी बढ़ती स्वायत्तता के बीच परीक्षणों में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां एजेंटों ने निर्धारित कार्य पूरा करने के दौरान अनपेक्षित कदम उठाए।
पाचोकी के मुताबिक तर्क करने में सक्षम भाषाई मॉडल अब वैज्ञानिक अनुसंधान, कंप्यूटर और ग्राफिकल इंटरफेस संचालन तथा शोध परियोजनाओं में सहयोग करने लगे हैं। हालांकि, इससे कंप्यूटर सुरक्षा के सामने नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मशीनी बुद्धिमत्ता का विकास इंसानी बुद्धिमत्ता से मौलिक रूप से अलग तरीके से होता है। इसलिए यह मान लेना उचित नहीं है कि एआई अपने आप मानवीय मूल्यों का पालन करेगा। उनके अनुसार एआई अनुसंधान की मूल चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि सिस्टम मानवीय मानकों के अनुरूप सही काम करने की कोशिश करे।
उन्होंने कहा कि ओपनएआई एआई को मानवीय मूल्यों के अनुरूप बनाने, उसकी निगरानी के तकनीकी उपाय विकसित करने और सुरक्षा प्रणालियां तैयार करने पर काम जारी रखेगी। हालांकि, व्यापक स्तर पर सरकारी और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप भी जरूरी है। उन्होंने मानवीय नियंत्रण बनाए रखने और एआई के कारण शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण से बचने की जरूरत पर जोर दिया।