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रोजगार बढ़ाने के उपाय और छोटे उद्योगों पर ध्यान देने की जरूरत

आम बजट से पहले अर्थशास्त्रियों की राय

नयी दिल्ली : अगले महीने पेश होने वाले आम बजट से पहले अर्थशास्त्रियों की राय है कि बजट में रोजगार बढ़ाने के उपाय और छोटे उद्योगों पर नए सिरे से ध्यान दिए जाने के साथ-साथ बैंकिग क्षेत्र में सुधार होने चाहिए। पिछले साल 12 लाख रुपये तक आय पर आयकर से राहत के बाद प्रत्यक्ष करों पर कोई बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं है। हालांकि सीमा शुल्क पर कुछ नीति लाई जा सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार एक फरवरी को लोकसभा में 2026-27 का बजट करेंगी। यह पहली बार होगा जब बजट रविवार को पेश किया जाएगा।

और बैंकों की जरूरत : जाने-माने अर्थशास्त्री एवं मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक एन आर भानुमूर्ति ने कहा, ‘‘ बजट में सरकार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों पर नए सिरे से ध्यान दिए जाने के साथ-साथ बैंकिग क्षेत्र में सुधारों का खाका पेश करना चाहिए। बजट दीर्घकालीन लक्ष्यों के साथ सुधारों पर केंद्रित 2047 के एजेंडे के लिए एक दृष्टि पत्र हो सकता है।बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के तहत हालांकि देश में कुछ बड़े बैंकों की जरूरत बतायी जा रही है और इसके लिए विलय की बातें हो रही हैं। हालांकि मेरा मानना है कि देश में और बैंकों की जरूरत है ताकि जरूरतमंदों को बैंक से जुड़ी सुविधाओं के साथ कर्ज आसानी से सुलभ हो सके।

व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत : इसका कारण अभी वित्तीय समावेश में हमें लंबा सफर तय करना है। एमएसएमई में कर्ज कोई अब समस्या नहीं है। बैंक कर्ज देने के लिए तैयार हैं लेकिन वह उन्हें मिल नहीं पा रहा है। एमएसएमई में छोटे स्तरों पर पुनर्गठन की जरूरत है, ताकि उन्हें संगठित क्षेत्र में लाया सके। छोटे उद्यमों में संचालन के स्तर पर पंजीकरण, ऑडिट और डिजिटल बुनियादी ढांचे से लेकर छोटे-छोटे स्तरों पर व्यवस्था को दुरूस्त करने की जरूरत है।

राजकोषीय मजबूती को प्राथमिकता : राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में प्रोफेसर लेखा चक्रवर्ती ने कहा, मेरा मानना है कि बजट में राजकोषीय मजबूती को प्राथमिकता दी जाएगी। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.4 प्रतिशत या उससे थोड़ा कम पर बनाए रखा जाएगा। इसके साथ बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, कृत्रिम मेधा (एआई) और रेलवे में पूंजीगत व्यय पर जोर दिया जाएगा। निजी निवेश को बढ़ावा देने, छोटे उद्यमों को समर्थन देने, उपभोग को गति देने और नीतिगत स्थिरता के लिए कर प्रशासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

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