अनिवार्य PF कटौती 1,800 रुपये तक सीमित, कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी बढ़ने की उम्मीद 
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EPFO का बड़ा फैसला: अनिवार्य PF कटौती 1,800 रुपये तक सीमित

नई कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026 के तहत 8 करोड़ से अधिक सदस्यों पर असर, अनिवार्य PF योगदान की ऊपरी सीमा तय होने से टेक-होम सैलरी में बढ़ोतरी की उम्मीद

नई दिल्ली : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड (PF) अंशदान के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अनिवार्य कर्मचारी योगदान की अधिकतम सीमा 1,800 रुपये प्रति माह निर्धारित कर दी है। नई 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' के तहत इससे अधिक पीएफ जमा करना अब पूरी तरह कर्मचारी की स्वैच्छिक इच्छा पर निर्भर करेगा। इस बदलाव का असर देश के करीब 8 करोड़ सक्रिय ईपीएफओ सदस्यों पर पड़ने की संभावना है।

15000 की वैधानिक वेतन सीमा तक लागू होगा अनिवार्य पीएफ अंशदान

नई व्यवस्था के अनुसार, अनिवार्य पीएफ अंशदान केवल 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा तक ही लागू होगा। इस सीमा के 12 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम अनिवार्य योगदान 1,800 रुपये प्रति माह बनता है। इसका मतलब यह है कि कर्मचारी का वेतन कितना भी अधिक क्यों न हो, अब अनिवार्य पीएफ कटौती 1,800 रुपये से ज्यादा नहीं होगी।

अधिक बेसिक सैलरी वालों को होगा लाभ

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी बेसिक सैलरी अधिक है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी एक लाख रुपये प्रतिमाह है, तब भी उसके वेतन से अनिवार्य पीएफ कटौती केवल 1,800 रुपये ही होगी। इसी तरह नियोक्ता को भी अनिवार्य रूप से अधिकतम 1,800 रुपये का ही योगदान करना होगा।

बढ़ जाएगी टेक होम सैलरी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की मासिक टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है, क्योंकि पहले की तुलना में वेतन से अनिवार्य पीएफ कटौती कम होगी। साथ ही कंपनियों की पीएफ संबंधी अनिवार्य वित्तीय जिम्मेदारी भी सीमित हो जाएगी, जिससे उनके सीटीसी ढांचे पर भी असर पड़ेगा।

नियोक्ता के लिए अतिरिक्त राशि जमा करना नहीं होगा अनिवार्य

हालांकि, रिटायरमेंट के लिए अधिक बचत करने के इच्छुक कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Contribution) का विकल्प पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। कर्मचारी चाहें तो 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा से अधिक वेतन पर भी अतिरिक्त पीएफ जमा कर सकते हैं, लेकिन ऐसे अतिरिक्त योगदान के बराबर राशि जमा करना नियोक्ता के लिए अनिवार्य नहीं होगा। कंपनियां अपनी नीति के अनुसार इस पर निर्णय ले सकेंगी।

अतिरिक्त योगदान रहेगा स्वैच्छिक

नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों किसी भी समय अतिरिक्त स्वैच्छिक पीएफ योगदान को कम कर सकते हैं या पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं।

ईपीएफओ का मानना है कि इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को अपनी आय और बचत के बीच बेहतर संतुलन बनाने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। साथ ही अनिवार्य पीएफ योगदान की सीमा तय होने से कर्मचारियों के हाथ में अधिक नकदी उपलब्ध होगी, जबकि संगठनों की अनिवार्य पीएफ देनदारी भी नियंत्रित रहेगी।

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