ब्रिटेन से कार आयात पर सस्ता शुल्क, 15 जुलाई से नई व्यवस्था लागू Aleksandar Mijatovic
बिजनेस

ब्रिटेन से कार आयात पर सस्ता शुल्क, 15 जुलाई से नई व्यवस्था लागू

भारत-ब्रिटेन एफटीए के तहत वाहनों पर सीमा शुल्क चरणबद्ध रूप से घटेगा, 110% से 10% तक कमी और TRQ कोटे के भीतर आयातकों को बड़ा लाभ

नई दिल्ली : भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत रियायती सीमा शुल्क पर वाहनों के आयात के लिए प्रक्रिया अधिसूचित कर दी है। यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू होगी। इसके तहत पात्र आयातकों को शुल्क कोटा (TRQ) का लाभ मिलेगा।

व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत भारत ब्रिटेन से तय कोटे के भीतर आयात होने वाले वाहनों पर सीमा शुल्क को मौजूदा लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक लाएगा। समझौते के पहले 15 वर्षों में ब्रिटेन से 3.78 लाख पारंपरिक इंजन वाले यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी।

12 महीने के लिए वैध होगा TRQ

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अनुसार, केवल ब्रिटेन में निर्मित वाहनों के मूल उपकरण निर्माता (OEM) या उनके अधिकृत डीलर और चैनल पार्टनर ही इस योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के साथ ब्रिटेन स्थित निर्माता द्वारा जारी पूर्व-क्रय समझौता और आयात के समय सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

डीजीएफटी पूरे वर्ष जारी किए गए TRQ प्रमाणपत्रों की निगरानी करेगा। कोटा पूरा होने के बाद कोई नया प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। प्रत्येक प्रमाणपत्र अधिकतम 12 महीने या संबंधित कैलेंडर वर्ष तक वैध रहेगा।

पहले साल 20,000 कारों के आयात की अनुमति

समझौते के पहले वर्ष में कुल 20,000 यात्री कारों के आयात की अनुमति होगी। बड़ी इंजन क्षमता वाली कारों पर सीमा शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि अन्य श्रेणियों की कारों पर शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत होगा।

सस्ती कारों और ईवी को संरक्षण

भारत ने 40,000 ब्रिटिश पाउंड (सीआईएफ) से कम कीमत वाले वाहनों के लिए अपना बाजार नहीं खोला है, ताकि घरेलू वाहन उद्योग और बड़े पैमाने के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार को संरक्षण मिल सके।

इसके अलावा, इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री कारों पर पहले पांच वर्षों तक कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी। छठे वर्ष से ही तय कोटे के तहत इन वाहनों पर रियायती शुल्क लागू होगा। इससे टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय कंपनियों को घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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