भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) ने नया अध्याय जोड़ दिया है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। इस निर्गम के लिए कुल मिलाकर लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि आवेदन करने वाले निवेशकों की संख्या 1.38 करोड़ से अधिक रही। इसके साथ ही कंपनी का आईपीओ भारतीय बाजार के सबसे अधिक मांग वाले सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है।
23 अक्टूबर को बोली लगाने की प्रक्रिया समाप्त होने तक आईपीओ को कुल उपलब्ध शेयरों की तुलना में 22.19 गुना अभिदान मिला। कंपनी लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से बाजार में उतरी थी। इस निर्गम की सफलता ऐसे समय में सामने आई है, जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। इसके बावजूद जियो में निवेश को लेकर दिखाई गई दिलचस्पी ने बाजार के जानकारों का ध्यान आकर्षित किया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को देश-विदेश के बड़े संस्थागत निवेशकों से मजबूत समर्थन मिला। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, ब्लैक रॉक और फिडेलिटी जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई से जुड़ी निवेश संस्थाओं ने भी इसमें रुचि दिखाई।
सबसे अधिक मांग योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में देखने को मिली। इस श्रेणी में उपलब्ध शेयरों की तुलना में लगभग 70.55 गुना बोलियां प्राप्त हुईं। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 14 गुना अभिदान दर्ज किया गया। छोटे व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से को भी 2.72 गुना अभिदान मिला।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जियो के कारोबार और भविष्य की योजनाओं को लेकर विभिन्न श्रेणियों के निवेशकों में भरोसा दिखाई दिया। हालांकि, किसी आईपीओ को मिलने वाली भारी मांग अपने आप में भविष्य में शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं होती। निवेशकों को कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और मूल्यांकन को भी ध्यान में रखना चाहिए।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में आवेदनों की संख्या शामिल है। इस निर्गम के लिए 1.38 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो भारतीय आईपीओ बाजार के लिए एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले भारत में सबसे अधिक आवेदन पाने वाले सार्वजनिक निर्गमों में वारी एनर्जीज का आईपीओ प्रमुख था, जिसे अक्टूबर 2024 में लगभग 97.34 लाख आवेदन मिले थे। जियो के निर्गम ने इस आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया। आवेदन करने वालों की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि कंपनी के शेयरों को लेकर केवल बड़े निवेशकों में ही नहीं, बल्कि आम निवेशकों में भी व्यापक उत्सुकता रही।
बोली प्रक्रिया शुरू होने के महज 100 मिनट के भीतर ही आईपीओ को पूरा अभिदान मिल गया था। यह भी इसकी मजबूत मांग का संकेत है। हालांकि, कुल आवेदन और वास्तविक आवंटन अलग-अलग बातें हैं। बड़ी संख्या में आवेदन आने का अर्थ यह नहीं है कि हर आवेदक को शेयर मिलेंगे।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ लगभग 30,213 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह नए शेयर जारी करने पर आधारित है। इसका अर्थ है कि कंपनी के मौजूदा शेयरधारक इस निर्गम के माध्यम से अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं, बल्कि नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इस व्यवस्था के तहत निर्गम से प्राप्त राशि कंपनी को मिलेगी।
निर्धारित मूल्य सीमा के ऊपरी स्तर, यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर, पर कंपनी का मूल्यांकन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठता है। इस आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल होने की स्थिति में होगी।
इस निर्गम के माध्यम से जुटाई जाने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी विकास, डिजिटल सेवाओं में निवेश, पूंजीगत व्यय और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी धन का उपयोग किया जाएगा।
जियो ने वर्ष 2016 में दूरसंचार सेवाओं की शुरुआत की थी। कम कीमत पर इंटरनेट और कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर कंपनी ने भारतीय दूरसंचार बाजार में बड़ा बदलाव किया। इसके बाद कंपनी ने अपनी सेवाओं का विस्तार करते हुए डिजिटल मंचों, घरेलू ब्रॉडबैंड और उद्यमों के लिए तकनीकी सेवाओं की दिशा में भी कदम बढ़ाए।
अब कंपनी की रणनीति केवल मोबाइल संपर्क सेवाओं तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल ढांचे में निवेश के जरिए नए कारोबार विकसित करना उसकी भविष्य की योजनाओं का हिस्सा है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक ग्राहक होने का दावा उसके लिए एक बड़ा आधार है, जिसके सहारे वह नई डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना चाहती है।
जियो के आईपीओ को मिली भारी मांग इस बात का संकेत है कि निवेशक कंपनी की मौजूदा बाजार स्थिति के साथ-साथ उसकी भविष्य की विकास योजनाओं को भी महत्व दे रहे हैं। हालांकि, इन योजनाओं को व्यावसायिक सफलता में बदलना कंपनी के लिए आगे की बड़ी चुनौती होगी।
आईपीओ के लिए बोली प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब निवेशकों की नजर शेयर आवंटन और शेयर बाजार में सूचीबद्धता पर है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, शेयरों का आवंटन 26 अक्टूबर को और बाजार में सूचीबद्धता 28 अक्टूबर को निर्धारित है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का निर्गम आकार, आवेदनों की संख्या और प्राप्त बोलियां इसे भारतीय पूंजी बाजार की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल करती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहता है और निवेशकों की उम्मीदें किस हद तक पूरी होती हैं।