जितेन्द्र, सन्मार्ग संवाददाता सांकतोड़िया : अक्टूबर-कोयला उद्योग में जेबीसीसीआई 12 के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड ने महत्वपूर्ण पहल की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया ने औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 14 से छूट दिए जाने को लेकर कोयला मंत्रालय को पत्र भेजा है। मंत्रालय के निर्णय के बाद ही समिति के गठन की आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। दरअसल, 3 सितंबर को हुई बैठक में बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू समेत प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने जेबीसीसीआई 12 के गठन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।यूनियन प्रतिनिधियों ने समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 14 से आवश्यक छूट देने की मांग की थी। अब कोल इंडिया की ओर से इस संबंध में मंत्रालय को पत्र भेजे जाने से कोयला कर्मियों और ट्रेड यूनियनों के बीच उम्मीद बढ़ी है। धारा 14 से छूट क्यों अहम जेबीसीसीआई कोयला उद्योग में प्रबंधन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बीच द्विपक्षीय औद्योगिक संबंधों का प्रमुख मंच माना जाता है। इसी मंच पर कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों, श्रम संबंधों और अन्य महत्वपूर्ण कर्मचारी हितों से जुड़े विषयों पर बातचीत होती रही है। ऐसे में औद्योगिक संबंध संहिता लागू होने के बाद जेबीसीसीआई 12 के गठन को लेकर धारा 14 से छूट का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। यूनियनों की ओर से लगातार इस विषय को उठाया जा रहा है। अब कोल इंडिया द्वारा मंत्रालय को पत्र भेजे जाने के बाद गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। यूनियनों की मांग के बाद पहल 3 सितंबर की बैठक में ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि कोयला उद्योग में द्विपक्षीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए जेबीसीसीआई 12 का गठन आवश्यक है। इसके लिए धारा 14 से छूट की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई थी। कोल इंडिया की ओर से मंत्रालय को पत्र भेजे जाने को इसी मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, समिति के गठन की अंतिम प्रक्रिया मंत्रालय के निर्णय और संबंधित औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी। कर्मचारियों की निगाह अब मंत्रालय के फैसले पर जेबीसीसीआई 12 के गठन को लेकर करीब 2.8 लाख गैर-कार्यपालक कर्मचारियों और कोयला क्षेत्र की ट्रेड यूनियनों की नजर अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। विशेष रूप से 12वें वेतन समझौते से जुड़े विषयों को लेकर इस समिति के गठन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेबीसीसीआई के गठन के बाद प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों के बीच वेतन, सेवा शर्तों तथा अन्य कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर संस्थागत बातचीत का रास्ता खुल सकता है।