नयी दिल्ली : बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा बरकरार रहने से शेयर आधारित म्यूचुअल फंड योजनाओं में मार्च में शुद्ध निवेश 56 प्रतिशत बढ़कर 40,450 करोड़ रुपये हो गया।
क्या रहा कारण : यह वृद्धि मुख्य रूप से फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप फंड में मजबूत निवेश के कारण हुई जिनकी कुल शुद्ध निवेश में बड़ी हिस्सेदारी रही। ‘एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया’ (एम्फी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिये मासिक निवेश बढ़कर 32,087 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले महीने 29,845 करोड़ रुपये था। फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये के मुकाबले मार्च में इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश बढ़कर 40,450 करोड़ रुपये हो गया। फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे अधिक 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश आया। इसके बाद स्मॉल कैप फंड में 6,263 करोड़ रुपये और मिड कैप फंड में 6,063 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
सकारात्मक प्रवाह : अधिकांश श्रेणियों में सकारात्मक प्रवाह रहा, हालांकि कर-बचत वाली ईएलएसएस योजनाओं में मामूली निकासी देखी गई। इस बीच गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में मार्च में 2,266 करोड़ रुपये का निवेश आया जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपये से काफी कम है।
क्या रही स्थिति : कुल मिलाकर, उद्योग में मार्च के दौरान 2.4 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का निवेश आया था। इसकी मुख्य वजह ऋण-आधारित डेट म्यूचुअल फंड से 2.95 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी रही। इस निकासी के कारण उद्योग की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) फरवरी के अंत में 82.03 लाख करोड़ रुपये से घटकर मार्च के अंत में 73.73 लाख करोड़ रुपये रह गईं।