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भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाया

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए वृद्धि दर के अनुमान घटाया गया है

नयी दिल्ली : रेटिंग एजेंसी इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने पहले इसके 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए वृद्धि दर के अनुमान घटाया गया है। इक्रा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.5 प्रतिशत लगाया है, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के दूसरे अग्रिम अनुमान 7.6 प्रतिशत से मामूली कम है।

औसत कीमत : इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, पश्चिम एशिया में जारी गतिरोध के कारण कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए, अब वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि हमारा पिछला अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था। परिणामस्वरूप, हमने वित्त वर्ष 2026-27 के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अपने अनुमान (2022-23 की स्थिर कीमतों पर) को घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है जो पहले 6.5 प्रतिशत था। 2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर तीन तिमाहियों के निचले स्तर 7.0 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। तीसरी तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत रही थी।

क्या रहा कारण : औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में धीमी वृद्धि के कारण जीडीपी वृद्धि में कमी आने का अनुमान है। हालांकि, कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में मामूली सुधार की उम्मीद है। नायर ने कहा, हालांकि, विनिर्माण मात्रा में धीमी वृद्धि, निर्यात में गिरावट और पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्जिन पर दबाव के शुरुआती संकेतों को देखते हुए तिमाही में औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि पर असर पड़ा है। हमारा अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि दर 2025-26 की चौथी तिमाही में तीन तिमाहियों के निचले स्तर सात प्रतिशत पर आ जाएगी, जो कि एनएसओ के तिमाही के लिए 7.3 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

वस्तु निर्यात पर असर : वैश्विक वृद्धि में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न पोत परिवहन को लेकर समस्याओं का असर 2025-26 की मार्च तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात पर पड़ा है और सालाना आधार पर यह 2.8 प्रतिशत घटा है। दिसंबर तिमाही में इसमें मामूली 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

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